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Hindi - Chapter 97 - Al-Qadr

Translation by Suhel Farooq Khan And Saifur Rahman Nadwi — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Qadr 97:1

हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया

Verse 2 — Surah Al-Qadr 97:2

और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है

Verse 3 — Surah Al-Qadr 97:3

शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है

Verse 4 — Surah Al-Qadr 97:4

इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं

Verse 5 — Surah Al-Qadr 97:5

ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है