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Hindi - Chapter 26 - Ash-Shuara

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Ash-Shuara 26:1

ता, सीन, मीम।

Verse 2 — Surah Ash-Shuara 26:2

ये प्रकाशमय पुस्तक की आयतें हैं।

Verse 3 — Surah Ash-Shuara 26:3

संभवतः, आप अपना प्राण[1] खो देने वाले हैं कि वे ईमान लाने वाले नहीं हैं

Verse 4 — Surah Ash-Shuara 26:4

यदि हम चाहें, तो उतार दें उनपर आकाश से ऐसी निशानी कि उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी की झुकी रह जायें[1]।

Verse 5 — Surah Ash-Shuara 26:5

और नहीं आती है उनके पालनहार, अति दयावान् की ओर से कोई नई शिक्षा, परन्तु वे उससे मुख फेरने वाले बन जाते हैं।

Verse 6 — Surah Ash-Shuara 26:6

तो उन्होंने झुठला दिया! अब उनके पास शीघ्र ही उसकी सूचनाएँ आ जायेंगी, जिसका उपहास वे कर रहे थे।

Verse 7 — Surah Ash-Shuara 26:7

और क्या उन्होंने धरती की ओर नहीं देखा कि हमने उसमें उगाई हैं, बहुत-सी प्रत्येक प्रकार की अच्छी वनस्पतियाँ

Verse 8 — Surah Ash-Shuara 26:8

निश्चय ही, इसमें बड़ी निशानी (लक्षण)[1] है। फिर उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।

Verse 9 — Surah Ash-Shuara 26:9

तथा वास्तव में, आपका पालनहार ही प्रभुत्वशाली, अति दयावान् है।

Verse 10 — Surah Ash-Shuara 26:10

(उन्हें उस समय की कथा सुनाओ) जब पुकारा आपके पालनहार ने मूसा को कि जाओ अत्याचारी जाति[1] के पास

Verse 11 — Surah Ash-Shuara 26:11

फ़िरऔन की जाति के पास, क्या वे डरते नहीं

Verse 12 — Surah Ash-Shuara 26:12

उसने कहाः मेरे पालनहार! वास्तव में, मुझे भय है कि वे मुझे झुठला देंगे।

Verse 13 — Surah Ash-Shuara 26:13

और संकुचित हो रहा है मेरा सीना और नहीं चल रही है मेरी ज़ुबान, अतः वह़्यी भेज दे हारून की ओर (भी)।

Verse 14 — Surah Ash-Shuara 26:14

और उनका मुझपर एक अपराध भी है। अतः, मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।

Verse 15 — Surah Ash-Shuara 26:15

अल्लाह ने कहाः कदापि ऐसा नहीं होगा। तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ, हम तुम्हारे साथ सुनने[1] वाले हैं।

Verse 16 — Surah Ash-Shuara 26:16

तो तुम दोनों जाओ और कहो कि हम विश्व के पालनहार के भेजे हुए (रसूल) हैं।

Verse 17 — Surah Ash-Shuara 26:17

कि तू हमारे साथ बनी इस्राईल को जाने दे।

Verse 18 — Surah Ash-Shuara 26:18

(फ़िरऔन ने) कहाः क्या हमने तेरा पालन नहीं किया है, अपने यहाँ बाल्यवस्था में और तू (नहीं) रहा है, हममें अपनी आयु के कई वर्ष

Verse 19 — Surah Ash-Shuara 26:19

और तू कर गया वह कार्य,[1] जो किया और तू कृतघनों में से है

Verse 20 — Surah Ash-Shuara 26:20

(मूसा ने) कहाः मैंने ऐसा उस समय कर दिया, जबकि मैं अनजान था।

Verse 21 — Surah Ash-Shuara 26:21

फिर मैं तुमसे भाग गया, जब तुमसे भय हुआ। फिर प्रदान कर दिया मुझे, मेरे पालनहार ने तत्वदर्शिता और मुझे बना दिया रसूलों में से।

Verse 22 — Surah Ash-Shuara 26:22

और ये कोई उपकार है, जो तू मुझे जता रहा है कि तूने दास बना लिया है, इस्राईल के पुत्रों को।

Verse 23 — Surah Ash-Shuara 26:23

फ़िरऔन ने कहाः विश्व का पालनहार क्या है

Verse 24 — Surah Ash-Shuara 26:24

(मूसा ने) कहाः आकाशों तथा धरती और उसका पालनहार, जो कुछ दोनों के बीच है, यदि तुम विश्वास रखने वाले हो।

Verse 25 — Surah Ash-Shuara 26:25

उसने उनसे कहा, जो उसके आस-पास थेः क्या तुम सुन नहीं रहे हो

Verse 26 — Surah Ash-Shuara 26:26

(मुसा ने) कहाः तुम्हारा पालनहार तथा तुम्हारे पूर्वोजों का पालनहार है।

Verse 27 — Surah Ash-Shuara 26:27

(फ़िरऔन ने) कहाः वास्तव में, तुम्हारा रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, पागल है।

Verse 28 — Surah Ash-Shuara 26:28

(मूसा ने) कहाः वह, पूर्व तथा पश्चिम तथा दोनों के मध्य जो कुछ है, सबका पालनहार है।

Verse 29 — Surah Ash-Shuara 26:29

(फ़िरऔन ने) कहाः यदि तूने कोई पूज्य बना लिया मेरे अतिरिक्त, तो तुझे बंदियों में कर दूँगा।

Verse 30 — Surah Ash-Shuara 26:30

(मूसा ने) कहाः क्या यद्यपि मैं ले आऊँ तेरे पास एक खुली चीज़

Verse 31 — Surah Ash-Shuara 26:31

उसने कहाः तू उसे ले आ, यदि सच्चा है।

Verse 32 — Surah Ash-Shuara 26:32

फिर उसने अपनी लाठी फेंक दी, तो अकस्मात वह एक प्रत्यक्ष अजगर बन गयी।

Verse 33 — Surah Ash-Shuara 26:33

तथा अपना हाथ निकाला, तो अकस्मात वह उज्ज्वल था, देखने वालों के लिए।

Verse 34 — Surah Ash-Shuara 26:34

उसने अपने प्रमुखों से कहा, जो उसके पास थेः वास्तव में, ये तो बड़ा दक्ष जादूगर है।

Verse 35 — Surah Ash-Shuara 26:35

ये चाहता है कि तुम्हें, तुम्हारी धरती से निकाल[1] दे, अपने जादू के बल से, तो अब तुम क्या आदेश देते हो

Verse 36 — Surah Ash-Shuara 26:36

सबने कहाः अवसर (समय) दो मूसा और उसके भाई (के विषय) को और भेज दो नगरों में एकत्र करने वालों को।

Verse 37 — Surah Ash-Shuara 26:37

वे तुम्हारे पास प्रत्येक बड़े दक्ष जादूगर को लायें।

Verse 38 — Surah Ash-Shuara 26:38

तो एकत्र कर लिए गये जादूगर एक निश्चित दिन के समय के लिए।

Verse 39 — Surah Ash-Shuara 26:39

तथा लोगों से कहा गया कि क्या तुम एकत्र होने वाले[1] हो

Verse 40 — Surah Ash-Shuara 26:40

ताकि हम पीछे चलें जादूगरों के यदि वही प्रभुत्वशाली (विजयी) हो जायें।

Verse 41 — Surah Ash-Shuara 26:41

और जब जादूगर आये, तो फ़िरऔन से कहाः क्या हमें कुछ पुरस्कार मिलेगा, यदि हम ही प्रभुत्वशाली होंगे

Verse 42 — Surah Ash-Shuara 26:42

उसने कहाः हाँ! और तुम उस समय (मेरे) समीपवर्तियों में हो जाओगे।

Verse 43 — Surah Ash-Shuara 26:43

मूसा ने उनसे कहाः फेंको, जो कुछ तुम फेंकने वाले हो।

Verse 44 — Surah Ash-Shuara 26:44

तो उन्होंने फेंक दी उपनी रस्सियाँ तथा अपनी लाठियाँ तथा कहाः फ़िरऔन के प्रभुत्व की शपथ! हम ही अवश्य प्रभुत्वशाली (विजयी) होंगे।

Verse 45 — Surah Ash-Shuara 26:45

अब मूसा ने फेंक दी अपनी लाठी, तो तत्क्षण वह निगलने लगी (उसे), जो झूठ वे बना रहे थे।

Verse 46 — Surah Ash-Shuara 26:46

तो गिर गये सभी जादूगर[1] सज्दा करते हुए।

Verse 47 — Surah Ash-Shuara 26:47

और सबने कह दियाः हम विश्व के पालनहार पर ईमान लाये।

Verse 48 — Surah Ash-Shuara 26:48

मूसा तथा हारून के पालनहार पर।

Verse 49 — Surah Ash-Shuara 26:49

(फ़िरऔन ने) कहाः तुम उसका विश्वास कर बैठे, इससे पहले कि मैं तुम्हें आज्ञा दूँ? वास्तव में, वह तुम्हारा बड़ा (गुरू) है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है, तो तुम्हें शीघ्र ज्ञान हो जायेगा, मैं अवश्य तुम्हारे हाथों तथा पैरों को विपरीत दिशा[1] से काट दूँगा तथा तुम सभी को फाँसी दे दूँगा

Verse 50 — Surah Ash-Shuara 26:50

सबने कहाः कोई चिन्ता नहीं, हमतो अपने पालनहार हीकी ओर फिरकर जाने वाले हैं।

Verse 51 — Surah Ash-Shuara 26:51

हम आशा रखते हैं कि क्षमा कर देगा, हमारे लिए, हमारा पालनहार, हमारे पापों को, क्योंकि हम सबसे पहले ईमान लाने वाले हैं।

Verse 52 — Surah Ash-Shuara 26:52

और हमने मूसा की ओर वह़्यी की कि रातों-रात निकल जा मेरे भक्तों को लेकर, तुम सबका पीछा किया जायेगा।

Verse 53 — Surah Ash-Shuara 26:53

तो फ़िरऔन ने भेज दिया नगरों में (सेना) एकत्र करने[1] वालों को।

Verse 54 — Surah Ash-Shuara 26:54

कि वे बहुत थोड़े लोग हैं।

Verse 55 — Surah Ash-Shuara 26:55

और (इसपर भी) वे हमें अति क्रोधित कर रहे हैं।

Verse 56 — Surah Ash-Shuara 26:56

और वास्तव में, हम एक गिरोह हैं सावधान रहने वाले।

Verse 57 — Surah Ash-Shuara 26:57

अन्ततः, हमने निकाल दिया उन्हें, बागों तथा स्रोतों से।

Verse 58 — Surah Ash-Shuara 26:58

तथा कोषों और उत्तम निवास स्थानों से।

Verse 59 — Surah Ash-Shuara 26:59

इसी प्रकार हुआ और हमने उनका उत्तराधिकारी बना दिया, इस्राईल की संतान को।

Verse 60 — Surah Ash-Shuara 26:60

तो उन्होंने उनका पीछा किया, प्रातः होते ही।

Verse 61 — Surah Ash-Shuara 26:61

और जब दोनों गिरोहों ने एक-दूसरे को देख लिया, तो मूसा के साथियों ने कहाः हमतो निश्चय ही पकड़ लिए[1] गये।

Verse 62 — Surah Ash-Shuara 26:62

(मूसा ने) कहाः कदापि नहीं, निश्चय मेरे साथ मेरा पालनहार है।

Verse 63 — Surah Ash-Shuara 26:63

तो हमने मूसा को वह़्यी की कि मार अपनी लाठी से सागर को, अकस्मात् सागर फट गया तथा प्रत्येक भाग, भारी पर्वत के समान[1] हो गया।

Verse 64 — Surah Ash-Shuara 26:64

तथा हमने समीप कर दिया उसी स्थान के, दूसरे गिरोह को।

Verse 65 — Surah Ash-Shuara 26:65

और मुक्ति प्रदान कर दी मूसा और उसके सब साथियों को।

Verse 66 — Surah Ash-Shuara 26:66

फिर हमने डुबो दिया दूसरों को।

Verse 67 — Surah Ash-Shuara 26:67

वास्तव में, इसमें बड़ी शिक्षा है और उनमें से अधिक्तर लोग ईमान वाले नहीं थे।

Verse 68 — Surah Ash-Shuara 26:68

तथा वास्तव में, आपका पालनहार निश्चय अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।

Verse 69 — Surah Ash-Shuara 26:69

तथा आप, उन्हें सुना दें, इब्राहीम का समाचार (भी)।

Verse 70 — Surah Ash-Shuara 26:70

जब उसने कहा, अपने बाप तथा अपनी जाति से कि तुम क्या पूज रहे हो

Verse 71 — Surah Ash-Shuara 26:71

उन्होंने कहाः हम मूर्तियों की पूजा कर रहे हैं और उन्हीं की सेवा में लगे रहते हैं।

Verse 72 — Surah Ash-Shuara 26:72

उसने कहाः क्या वे तुम्हारी सुनती हैं, जब तुम पुकारते हो

Verse 73 — Surah Ash-Shuara 26:73

या तुम्हें लाभ पहुँचाती या हानि पहुँचाती हैं

Verse 74 — Surah Ash-Shuara 26:74

उन्होंने कहाः बल्कि हमने अपने पूर्वोजों को ऐसा ही करते हुए पाया है।

Verse 75 — Surah Ash-Shuara 26:75

उसने कहाः क्या तुमने कभी (आँख खोलकर) उसे देखा, जिसे तुम पूज रहे हो।

Verse 76 — Surah Ash-Shuara 26:76

तुम तथा तुम्हारे पहले पूर्वज

Verse 77 — Surah Ash-Shuara 26:77

क्योंकि ये सब मेरे शत्रु हैं, पूरे विश्व के पालनहार के सिवा।

Verse 78 — Surah Ash-Shuara 26:78

जिसने मुझे पैदा किया, फिर वही मुझे मार्ग दर्शा रहा है।

Verse 79 — Surah Ash-Shuara 26:79

और जो मुझे खिलाता और पिलाता है।

Verse 80 — Surah Ash-Shuara 26:80

और जब रोगी होता हूँ, तो वही मुझे स्वस्थ करता है।

Verse 81 — Surah Ash-Shuara 26:81

तथा वही मुझे मारेगा, फिर[1] मुझे जीवित करेगा।

Verse 82 — Surah Ash-Shuara 26:82

तथा मैं आशा रखता हूँ कि क्षमा कर देगा, मेरे लिए, मेरे पाप, प्रतिकार (प्रलय) के दिन।

Verse 83 — Surah Ash-Shuara 26:83

हे मेरे पालनहार! प्रदान कर दे मुझे तत्वदर्शिता और मुझे सम्मिलित कर सदाचारियों में।

Verse 84 — Surah Ash-Shuara 26:84

और मुझे सच्ची ख्याति प्रदान कर, आगामी लोगों में।

Verse 85 — Surah Ash-Shuara 26:85

और बना दे मुझे, सुख के स्वर्ग का उत्तराधिकारी।

Verse 86 — Surah Ash-Shuara 26:86

तथा मेरे बाप को क्षमा कर दे,[1] वास्तव में, वह कुपथों में से है।

Verse 87 — Surah Ash-Shuara 26:87

तथा मुझे निरादर न कर, जिस दिन सब जीवित किये[1] जायेंगे।

Verse 88 — Surah Ash-Shuara 26:88

जिस दिन, लाभ नहीं देगा कोई धन और न संतान।

Verse 89 — Surah Ash-Shuara 26:89

परन्तु, जो अल्लाह के पास स्वच्छ दिल लेकर आयेगा।

Verse 90 — Surah Ash-Shuara 26:90

और समीप कर दी जायेगी स्वर्ग आज्ञाकारियों के लिए।

Verse 91 — Surah Ash-Shuara 26:91

तथा खोल दी जायेगी नरक कुपथों के लिए।

Verse 92 — Surah Ash-Shuara 26:92

तथा कहा जायेगाः कहाँ हैं वे, जिन्हें तुम पूज रहे थे

Verse 93 — Surah Ash-Shuara 26:93

अल्लाह के सिवा, क्या वे तुम्हारी सहायता करेंगे अथवा स्वयं अपनी सहायता कर सकते हैं

Verse 94 — Surah Ash-Shuara 26:94

फिर उसमें औंधे झोंक दिये जायेंगे वे और सभी कुपथ।

Verse 95 — Surah Ash-Shuara 26:95

और इब्लीस की सेना सभी।

Verse 96 — Surah Ash-Shuara 26:96

और वे उसमें आपस में झगड़ते हुए कहंगेः

Verse 97 — Surah Ash-Shuara 26:97

अल्लाह की शपथ! वास्तव में, हम खुले कुपथ में थे।

Verse 98 — Surah Ash-Shuara 26:98

जब हम तुम्हें, बराबर समझ रहे थे विश्व के पालनहार के।

Verse 99 — Surah Ash-Shuara 26:99

और हमें कुपथ नहीं किया, परन्तु अपराधियों ने।

Verse 100 — Surah Ash-Shuara 26:100

तो हमारा कोई अभिस्तावक (सिफ़ारिशी) नहीं रह गया।

Verse 101 — Surah Ash-Shuara 26:101

तथा न कोई प्रेमी मित्र।

Verse 102 — Surah Ash-Shuara 26:102

तो यदि हमें पुनः संसार में जाना होता,[1] तो हम ईमान वालों में हो जाते।

Verse 103 — Surah Ash-Shuara 26:103

निःसंदेह, इसमें बड़ी निशानी है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।

Verse 104 — Surah Ash-Shuara 26:104

और वास्तव में, आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली,[1] दयावान् है।

Verse 105 — Surah Ash-Shuara 26:105

नूह़ की जाति ने भी रसूलों को झुठलाया।

Verse 106 — Surah Ash-Shuara 26:106

जब उनसे उनके भाई नूह़ ने कहाः क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं हो

Verse 107 — Surah Ash-Shuara 26:107

वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक[1] रसूल हूँ।

Verse 108 — Surah Ash-Shuara 26:108

अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी बात मानो।

Verse 109 — Surah Ash-Shuara 26:109

मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला), मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।

Verse 110 — Surah Ash-Shuara 26:110

अतः, तुम अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।

Verse 111 — Surah Ash-Shuara 26:111

उन्होंने कहाः क्या हम तुझे मान लें, जबकि तेरा अनुसरण पतित (नीच) लोग[1] कर रहे हैं

Verse 112 — Surah Ash-Shuara 26:112

(नूह़ ने) कहाः मूझे क्य ज्ञान कि वे क्या कर्म करते रहे हैं

Verse 113 — Surah Ash-Shuara 26:113

उनका ह़िसाब तो बस मेरे पालनहार के ऊपर है, यदि तुम समझो।

Verse 114 — Surah Ash-Shuara 26:114

और मैं धुतकारने वाला[1] नहीं हूँ, ईमान वालों को।

Verse 115 — Surah Ash-Shuara 26:115

मैं तो बस खुला सावधान करने वाला हूँ।

Verse 116 — Surah Ash-Shuara 26:116

उन्होंने कहाः यदि रुका नहीं, हे नूह़! तो तू अवश्य पथराव करके मारे हुओं में होगा।

Verse 117 — Surah Ash-Shuara 26:117

उसने कहाः मेरे पालनहार! मेरी जाति ने मुझे झुठला दिया।

Verse 118 — Surah Ash-Shuara 26:118

अतः, तू निर्णय कर दे मेरे और उनके बीच और मुक्त कर दे मुझे तथा उन्हें जो मेरे साथ हैं, ईमान वालों में से।

Verse 119 — Surah Ash-Shuara 26:119

तो हमने उसे मुक्त कर दिया तथा उन्हें जो उसके साथ भरी नाव में थे।

Verse 120 — Surah Ash-Shuara 26:120

फिर हमने डुबो दिया उसके पश्चात्, शेष लोगों को।

Verse 121 — Surah Ash-Shuara 26:121

वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है तथा उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं।

Verse 122 — Surah Ash-Shuara 26:122

और निश्चय आपका पालनहार ही अति प्रभुत्वशाली, दयावान् है।

Verse 123 — Surah Ash-Shuara 26:123

झुठला दिया आद (जाति) ने (भी) रसूलों को।

Verse 124 — Surah Ash-Shuara 26:124

जब कहा उनसे, उनके भाई हूद[1] नेः क्या तुम डरते नहीं हो

Verse 125 — Surah Ash-Shuara 26:125

वस्तुतः, मैं तुम्हारे लिए एक न्यासिक (अमानतदार) रसूल हूँ।

Verse 126 — Surah Ash-Shuara 26:126

अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।

Verse 127 — Surah Ash-Shuara 26:127

और मैं तुमसे कोई पारिश्रमिक (बदला) नहीं माँगता, मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।

Verse 128 — Surah Ash-Shuara 26:128

क्यों तुम बना लेते हो, हर ऊँचे स्थान पर एक यादगार भवन, व्यर्थ में

Verse 129 — Surah Ash-Shuara 26:129

तथा बनाते हो, बड़े-बड़े भवन, जैसे कि तुम सदा रहोगे।

Verse 130 — Surah Ash-Shuara 26:130

और जबकिसी को पकड़ते हो, तो पकड़ते हो, महा अत्याचारी बनकर।

Verse 131 — Surah Ash-Shuara 26:131

तो अल्लाह से डरो और मेरी आज्ञा का पालन करो।

Verse 132 — Surah Ash-Shuara 26:132

तथा उससे भय रखो, जिसने तुम्हारी सहायता की है उससे, जो तुम जानते हो।

Verse 133 — Surah Ash-Shuara 26:133

उसने सहायता की है तुम्हारी चौपायों तथा संतान से।

Verse 134 — Surah Ash-Shuara 26:134

तथा बाग़ों (उद्यानो) तथा जल स्रोतों से।

Verse 135 — Surah Ash-Shuara 26:135

मैं तुमपर डरता हूँ, भीषण दिन की यातना से।

Verse 136 — Surah Ash-Shuara 26:136

उन्होंने कहाः नसीह़त करो या न करो, हमपर सब समान है।

Verse 137 — Surah Ash-Shuara 26:137

ये बात तो बस प्राचीन लोगों की नीति[1] है।

Verse 138 — Surah Ash-Shuara 26:138

और हम उनमें से नहीं हैं, जिन्हें यातना दी जायेगी।

Verse 139 — Surah Ash-Shuara 26:139

अन्ततः, उन्होंने हमें झुठला दिया, तो हमने उन्हें ध्वस्त कर दिया। निश्चय इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और लोगों में अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं हैं।

Verse 140 — Surah Ash-Shuara 26:140

और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।

Verse 141 — Surah Ash-Shuara 26:141

झुठला दिया समूद ने (भी)[1] रसूलों को।

Verse 142 — Surah Ash-Shuara 26:142

जब कहा उनसे उनके भाई सालेह़ नेः क्या तुम डरते नहीं हो

Verse 143 — Surah Ash-Shuara 26:143

वास्तव में, मैं तुम्हारा विश्वसनीय रसूल हूँ।

Verse 144 — Surah Ash-Shuara 26:144

तो तुम अल्लाह से डरो और मेरा कहा मानो।

Verse 145 — Surah Ash-Shuara 26:145

तथा मैं नहीं माँगता इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।

Verse 146 — Surah Ash-Shuara 26:146

क्या तुम छोड़ दिये जाओगे उसमें, जो यहाँ हैं निश्चिन्त रहकर

Verse 147 — Surah Ash-Shuara 26:147

बाग़ों तथा स्रोतों में।

Verse 148 — Surah Ash-Shuara 26:148

तथा खेतों और खजूरों में, जिनके गुच्छे रस भरे हैं।

Verse 149 — Surah Ash-Shuara 26:149

तथा तुमपर्वतों को तराशकर घर बनाते हो, गर्व करते हुए।

Verse 150 — Surah Ash-Shuara 26:150

अतः, अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।

Verse 151 — Surah Ash-Shuara 26:151

और पालन न करो उल्लंघनकारियों के आदेश का।

Verse 152 — Surah Ash-Shuara 26:152

जो उपद्रव करते हैं धरती में और सुधार नहीं करते।

Verse 153 — Surah Ash-Shuara 26:153

उन्होंने कहाः वास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।

Verse 154 — Surah Ash-Shuara 26:154

तू तो बस हमारे समान एक मानव है। तो कोई चमत्कार ले आ, यदि तू सच्चा है।

Verse 155 — Surah Ash-Shuara 26:155

कहाः ये ऊँटनी है,[1] इसके लिए पानी पीने का एक दिन है और तुम्हारे लिए पानी लेने का निश्चित दिन है।

Verse 156 — Surah Ash-Shuara 26:156

तथा उसे हाथ न लगाना बुराई से, अन्यथा तुम्हें पकड़ लेगी एक भीषण दिन की यातना।

Verse 157 — Surah Ash-Shuara 26:157

तो उन्होंने वध कर दिया उसे, अन्ततः, पछताने वाले हो गये।

Verse 158 — Surah Ash-Shuara 26:158

और पकड़ लिया उन्हें यातना ने। वस्तुतः, इसमें बड़ी निशानी है और नहीं थे उनमें से अधिक्तर ईमान वाले।

Verse 159 — Surah Ash-Shuara 26:159

और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।

Verse 160 — Surah Ash-Shuara 26:160

झुठला दिया लूत की जाति ने (भी) रसूलों को।

Verse 161 — Surah Ash-Shuara 26:161

जब कहा उनसे उनके भाई लूत नेः क्या तुम डरते नहीं हो

Verse 162 — Surah Ash-Shuara 26:162

वास्तव में, मैं तुम्हारे लिए एक अमानतदार रसूल हूँ।

Verse 163 — Surah Ash-Shuara 26:163

अतः अल्लाह से डरो और मेरा अनुपालन करो।

Verse 164 — Surah Ash-Shuara 26:164

और मैं तुमसे प्रश्न नहीं करता, इसपर किसी पारिश्रमिक (बदले) का। मेरा बदला तो बस सर्वलोक के पालनहार पर है।

Verse 165 — Surah Ash-Shuara 26:165

क्या तुम जाते[1] हो पुरुषों के पास, संसार वासियों में से।

Verse 166 — Surah Ash-Shuara 26:166

तथा छोड़ देते हो उसे, जिसे पैदा किया है तुम्हारे पालनहार ने, अर्थात अपनी प्तनियों को, बल्कि तुम एक जाति हो, सीमा का उल्लंघन करने वाली।

Verse 167 — Surah Ash-Shuara 26:167

उन्होंने कहाः यदि तू नहीं रुका, हे लूत! तो अवश्य तेरा बहिष्कार कर दिया जायेगा।

Verse 168 — Surah Ash-Shuara 26:168

उसने कहाः वास्तव में, मैं तुम्हारे करतूत से बहुत अप्रसन्न हूँ।

Verse 169 — Surah Ash-Shuara 26:169

मेरे पालनहार! मुझे बचा ले तथा मेरे परिवार को उससे, जो वे कर रहे हैं।

Verse 170 — Surah Ash-Shuara 26:170

तो हमने उसे बचा लिया तथा उसके सभी परिवार को।

Verse 171 — Surah Ash-Shuara 26:171

परन्तु, एक बुढ़िया[1] को, जो पीछे रह जाने वालों में थी।

Verse 172 — Surah Ash-Shuara 26:172

फिर हमने विनाश कर दिया दूसरों का।

Verse 173 — Surah Ash-Shuara 26:173

और वर्षा की उनपर, एक घोर[1] वर्षा। तो बुरी हो गयी डराये हुए लोगों की वर्षा।

Verse 174 — Surah Ash-Shuara 26:174

वास्तव में, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और उनमें से अधिक्तर ईमान लाने वाले नहीं थे।

Verse 175 — Surah Ash-Shuara 26:175

और निश्चय आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।

Verse 176 — Surah Ash-Shuara 26:176

झुठला दिया ऐय्का[1] वालों ने रसूलों को।

Verse 177 — Surah Ash-Shuara 26:177

जब कहा उनसे शोऐब नेः क्या तुम डरते नहीं हो

Verse 178 — Surah Ash-Shuara 26:178

मैं तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ।

Verse 179 — Surah Ash-Shuara 26:179

अतः, अल्लाह से डरो तथा मेरी आज्ञा का पालन करो।

Verse 180 — Surah Ash-Shuara 26:180

और मैं नहीं माँगता तुमसे इसपर कोई पारिश्रमिक, मेरा पारिश्रमिक तो बस समस्त विश्व के पालनहार पर है।

Verse 181 — Surah Ash-Shuara 26:181

तुम नाप-तोल पूरा करो और न बनो कम देने वालों में।

Verse 182 — Surah Ash-Shuara 26:182

और तोलो सीधी तराज़ू से।

Verse 183 — Surah Ash-Shuara 26:183

और मत कम दो लोगों को उनकी चीज़ें और मत फिरो धरती में उपद्रव फैलाते।

Verse 184 — Surah Ash-Shuara 26:184

और डरो उससे, जिसने पैदा किया है तुम्हें तथा अगले लोगों को।

Verse 185 — Surah Ash-Shuara 26:185

उन्होंने कहाःवास्तव में, तू उनमें से है, जिनपर जादू कर दिया गया है।

Verse 186 — Surah Ash-Shuara 26:186

और तू तो बस एक पुरुष[1] है, हमारे समान और हम तो तुझे झूठों में समझते हैं।

Verse 187 — Surah Ash-Shuara 26:187

तो हमपर गिरा दे कोई खण्ड आकाश का, यदि तू सच्चा है।

Verse 188 — Surah Ash-Shuara 26:188

उसने कहाः मेरा पालनहार भली प्रकार जानता है उसे, जो कुछ तुम कर रहे हो।

Verse 189 — Surah Ash-Shuara 26:189

तो उन्होंने उसे झुठला दिया। अन्ततः, पकड़ लिया उन्हें छाया के[1] दिन की यातना ने। वस्तुतः, वह एक भीषण दिन की यातना थी।

Verse 190 — Surah Ash-Shuara 26:190

निश्चय ही, इसमें एक बड़ी निशानी (शिक्षा) है और नहीं थे उनमें अधिक्तर ईमान लाने वाले।

Verse 191 — Surah Ash-Shuara 26:191

और वास्तव में, आपका पालनहार ही अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् है।

Verse 192 — Surah Ash-Shuara 26:192

तथा निःसंदेह, ये (क़ुर्आन) पूरे विश्व के पालनहार का उतारा हुआ है।

Verse 193 — Surah Ash-Shuara 26:193

इसे लेकर रूह़ुल अमीन[1] उतरा।

Verse 194 — Surah Ash-Shuara 26:194

आपके दिल पर, ताकि आप हो जायें सावधान करने वालों में।

Verse 195 — Surah Ash-Shuara 26:195

खुली अरबी भाषा में।

Verse 196 — Surah Ash-Shuara 26:196

तथा इसकी चर्चा[1] अगले रसूलों की पुस्तकों में (भी) है।

Verse 197 — Surah Ash-Shuara 26:197

क्या और उनके लिए ये निशानी नहीं है कि इस्राईलियों के विद्वान[1] इसे जानते हैं।

Verse 198 — Surah Ash-Shuara 26:198

और यदि हम इसे उतार देते किसी अजमी[1] पर।

Verse 199 — Surah Ash-Shuara 26:199

और वह, इसे उनके समक्ष पढ़ता, तो वे उसपर ईमान लाने वाले न होते[1]।

Verse 200 — Surah Ash-Shuara 26:200

इसी प्रकार, हमने घुसा दिया है इस (क़ुर्आन के इन्कार) को पापियों के दिलों में।

Verse 201 — Surah Ash-Shuara 26:201

वे नहीं ईमान लायेंगे उसपर, जब तक देख नहीं लेंगे दुःखदायी यातना।

Verse 202 — Surah Ash-Shuara 26:202

फिर, वह उनपर सहसा आ जायेगी और वे समझ भी नहीं पायेंगे।

Verse 203 — Surah Ash-Shuara 26:203

तो कहेंगेः क्या हमें अवसर दिया जायेगा

Verse 204 — Surah Ash-Shuara 26:204

तो क्या वे हमारी यातना की जल्दी मचा रहे हैं

Verse 205 — Surah Ash-Shuara 26:205

(हे नबी!) तो क्या आपने विचार किया कि यदि हम लाभ पहुँचायें इन्हें वर्षों।

Verse 206 — Surah Ash-Shuara 26:206

फिर आ जाये उनपर वह, जिसकी उन्हें धमकी दी जा रही थी।

Verse 207 — Surah Ash-Shuara 26:207

तो कुछ काम नहीं आयेगा उनके, जो उन्हें लाभ पहुँचाया जाता रहा

Verse 208 — Surah Ash-Shuara 26:208

और हमने किसी बस्ती का विनाश नहीं किया, परन्तु उसके लिए सावधान करने वाले थे।

Verse 209 — Surah Ash-Shuara 26:209

शिक्षा देने के लिए और हम अत्याचारी नहीं हैं।

Verse 210 — Surah Ash-Shuara 26:210

तथा नहीं उतरे हैं (इस क़ुर्आन) को लेकर शैतान।

Verse 211 — Surah Ash-Shuara 26:211

और न योग्य है उनके लिए और न वे इसकी शक्ति रखते हैं।

Verse 212 — Surah Ash-Shuara 26:212

वास्तव में, वे तो (इसके) सुनने से भी दूर[1] कर दिये गये हैं।

Verse 213 — Surah Ash-Shuara 26:213

अतः, आप न पुकारें अल्लाह के साथ किसी अन्य पूज्य को, अन्यथा आप दण्डितों में हो जायेंगे।

Verse 214 — Surah Ash-Shuara 26:214

और आप सावधान कर दें अपने समीपवर्ती[1] संबंधियों को।

Verse 215 — Surah Ash-Shuara 26:215

और झुका दें अपना बाहु[1] उसके लिए, जो आपका अनुयायी हो, ईमान वालों में से।

Verse 216 — Surah Ash-Shuara 26:216

और यदि वे आपकी अवज्ञा करें, तो आप कह दें कि मैं निर्दोष हूँ उससे, जो तुम कर रहे हो।

Verse 217 — Surah Ash-Shuara 26:217

तथा आप भरोसा करें अत्यंत प्रभुत्वशाली, दयावान् पर।

Verse 218 — Surah Ash-Shuara 26:218

जो देखता है आपको, जिस समय (नमाज़) में खड़े होते हैं।

Verse 219 — Surah Ash-Shuara 26:219

और आपके फिरने को सज्दा करने[1] वालों में।

Verse 220 — Surah Ash-Shuara 26:220

निःसंदेह, वही सब कुछ सुनने-जानने वाला है।

Verse 221 — Surah Ash-Shuara 26:221

क्या मैं तुम सबको बताऊँ कि किसपर शैतान उतरते हैं

Verse 222 — Surah Ash-Shuara 26:222

वे उतरते हैं, प्रत्येक झूठे पापी[1] पर।

Verse 223 — Surah Ash-Shuara 26:223

वे पहुँचा देते हैं, सुनी सुनाई बातों को और उनमें अधिक्तर झूठे हैं।

Verse 224 — Surah Ash-Shuara 26:224

और कवियों का अनुसरण बहके हुए लोग करते हैं।

Verse 225 — Surah Ash-Shuara 26:225

क्या आप नहीं देखते कि वे प्रत्येक वादी में फिरते[1] हैं।

Verse 226 — Surah Ash-Shuara 26:226

और ऐसी बात कहते हैं, जो करते नहीं।

Verse 227 — Surah Ash-Shuara 26:227

परन्तु वो (कवि), जो[1] ईमान लाये, सदाचार किये, अल्लाह का बहुत स्मरण किया तथा बदला लिया इसके पश्चात् कि उनके ऊपर अत्याचार किया गया! तथा शीघ्र ही जान लेंगे, जिन्होंने अत्याचार किया है कि व किस दुष्परिणाम की ओर फिरते हैं