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Hindi - Chapter 50 - Qaf
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Qaf 50:1
क़ाफ़। शपथ है आदरणीय क़ुर्आन की
Verse 2 — Surah Qaf 50:2
बल्कि उन्हें आश्चर्य हुआ कि आ गया उनके पास एक सावधान करने वाला, उन्हीं मे से। तो कहा काफ़िरों नेः ये तो बड़े आश्चर्य[1] की बात है।
Verse 3 — Surah Qaf 50:3
क्या जब हम मर जायेंगे और धूल हो जायेंगे (तो पुनः जीवित किये जायेंगे)? ये वापसी तो दूर की बात[1] (असंभव) है।
Verse 4 — Surah Qaf 50:4
हमें ज्ञान है जो कम करती है धरती उनका अंश तथा हमारे पास एक सुरक्षित पुस्तक[1] है।
Verse 5 — Surah Qaf 50:5
बल्कि उनहोंने झुठला दिया सत्य को, जब आ गया उनके पास। इसलिए उलझन में पड़े हुए हैं।
Verse 6 — Surah Qaf 50:6
क्या उन्होंने नहीं देखा आकाश की ओर अपने ऊपर कि कैसा बनाया है हमने उसे और सजाया है उसको और नहीं है उसमें कोई दराड़
Verse 7 — Surah Qaf 50:7
तथा हमने धरती को फैलाया और डाल दिये उसमें पर्वत तथा उपजायी उसमें प्रत्येक प्रकार की सुन्दर वनस्पतियाँ।
Verse 8 — Surah Qaf 50:8
आँख खोलने तथा शिक्षा देने के लिए, प्रत्येक अल्लाह की ओर ध्यानमग्न भक्त के लिए।
Verse 9 — Surah Qaf 50:9
तथा हमने उतारा आकाश से शुभ जल, फिर उगाये उसके द्वारा बाग़ तथा अन्न, जो काटे जायें।
Verse 10 — Surah Qaf 50:10
तथा खजूर के ऊँचे वृक्ष, जिनके गुच्छे गुथे हुए हैं।
Verse 11 — Surah Qaf 50:11
जीविका के लिए भक्तों की तथा हमने जीवित कर दिया निर्जीव नगर को। इसी प्रकार (तुम्हें भी) निकलना है।
Verse 12 — Surah Qaf 50:12
झुठलाया इससे पहले नूह़ की जाति तथा कुवें के वासियों एवं समूद ने।
Verse 13 — Surah Qaf 50:13
तथा आद और फ़िरऔन एवं लूत के भाईयों ने।
Verse 14 — Surah Qaf 50:14
तथा ऐका के वासियों ने और तुब्बअ[1] की जाति ने। प्रत्येक ने झुठलाया[2] रसूलों को। अन्ततः, सच हो गयी (उनपर) हमारी धमकी।
Verse 15 — Surah Qaf 50:15
तो क्या हम थक गये हैं प्रथम बार पैदा करके? बल्कि, ये लोग संदेह में पड़े हुए हैं नये जीवन के बारे में।
Verse 16 — Surah Qaf 50:16
जबकि हमने ही पैदा किया है मनुष्य को और हम जानते हैं जो विचार आते हैं उसके मन में तथा हम अधिक समीप हैं उससे (उसकी) प्राणनाड़ी[1] से।
Verse 17 — Surah Qaf 50:17
जबकि[1] (उसके) दायें-बायें दो फ़रिश्ते लिख रहे हैं।
Verse 18 — Surah Qaf 50:18
वह नहीं बोलता कोई बात, मगर उसे लिखने के लिए उसके पास एक निरीक्षक तैयार होता है।
Verse 19 — Surah Qaf 50:19
आ पहुँची मौत की अचेतना (बे होशी) सत्य लेकर। ये वही है, जिस से तू भाग रहा था।
Verse 20 — Surah Qaf 50:20
और फूँक दिया गया सूर (नरसिंघा) में। यही यातना के वचन का दिन है।
Verse 21 — Surah Qaf 50:21
तथा आयेगा प्रत्येक प्राणी इस दशा में कि उसके साथ एक हाँकने[1] वाला और एक गवाह होगा।
Verse 22 — Surah Qaf 50:22
तू इसी से अचेत था, तो हमने दूर कर दिया तेरा पर्दा, तो तेरी आँख आज ख़ूब देख रही है।
Verse 23 — Surah Qaf 50:23
तथा कहा उसके साथी[1] नेः ये है, जो मेरे पास तैयार है।
Verse 24 — Surah Qaf 50:24
दोनों (फ़रिश्तों को आदेश होगा कि) फेंक दो नरक में प्रत्येक काफ़िर (सत्य के) विरोधी को।
Verse 25 — Surah Qaf 50:25
भलाई के रोकने वाले, अधर्मी, संदेह करने वाले को।
Verse 26 — Surah Qaf 50:26
जिसने बना लिए अल्लाह के साथ दूसरे पूज्य, तो दोनों को फेंक दो, कड़ी यातना में।
Verse 27 — Surah Qaf 50:27
उसके साथी (शैतान) ने कहाः हे हमारे पालनहार! मैंने इसे कुपथ नहीं किया, परन्तु, वह स्वयं दूर के कुपथ में था।
Verse 28 — Surah Qaf 50:28
अल्लाह ने कहाः झगड़ा न करो मेरे पास। मैंने तो पहले ही (संसार में) तुम्हारी ओर चेतावनी भेज दी थी।
Verse 29 — Surah Qaf 50:29
नहीं बदली जाती बात मेरे पास[1] और न मैं तनिक भी अत्याचारी हूँ भक्तों के लिए।
Verse 30 — Surah Qaf 50:30
जिस दिन हम कहेंगे नरक से कि तू भर गयी? और वह कहेगी क्या कुछ और है
Verse 31 — Surah Qaf 50:31
तथा समीप कर दी जायेगी स्वर्ग, वह सदाचारियों से कुछ दूर न होगी।
Verse 32 — Surah Qaf 50:32
ये है जिसका तुम्हें वचन दिया जाता था, प्रत्येक ध्यानमग्न रक्षक[1] के लिए।
Verse 33 — Surah Qaf 50:33
जो डरा अत्यंत कृपाशील से बिन देखे तथा लेकर आया ध्यानमग्न दिल।
Verse 34 — Surah Qaf 50:34
प्रवेश कर जाओ इसमें, शान्ति के साथ। ये सदैव रहने का दिन है।
Verse 35 — Surah Qaf 50:35
उन्हीं के लिए, जो वे इच्छा करेंगे उसमें मिलेगा तथा हमारे पास (इससे भी) अधिक है।
Verse 36 — Surah Qaf 50:36
तथा हम विनाश कर चुके हैं इनसे पूर्व, बहुत-से समुदायों का, जो इनसे अधिक थे शक्ति में। तो वे फिरते रहे नगरों में, तो क्या कहीं कोई भागने की जगह पा सके
Verse 37 — Surah Qaf 50:37
वास्तव में, इसमें निश्चय शिक्षा है उसके लिए, जिसके दिल हों अथवा कान धरे और वह उपस्थित[1] हो।
Verse 38 — Surah Qaf 50:38
तथा निश्चय हमने पैदा किया है आकाशों तथा धरती को और जो कुछ दोनों के बीच है, छः दिनों में और हमें कोई थकान नहीं हुई।
Verse 39 — Surah Qaf 50:39
तो आप सहन करें उनकी बातों को तथा पवित्रता का वर्णन करें अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ, सूर्य के निकलने से पहले तथा डूबने से पहले।
Verse 40 — Surah Qaf 50:40
तथा रात के कुछ भाग में उसकी पवित्रता का वर्णन करें और सज्दों (नमाज़ों) के पश्चात् (भी)।
Verse 41 — Surah Qaf 50:41
तथा ध्यान से सुनो, जिस दिन पुकारने वाला[1] पुकारेगा समीप स्थान से।
Verse 42 — Surah Qaf 50:42
जिस दिन सब सुनेंगे कड़ी आवाज़ सत्य के साथ, वही निकलने का दिन होगा।
Verse 43 — Surah Qaf 50:43
वास्तव में, हम ही जीवन देते तथा मारते हैं और हमारी ओर ही फिरकर आना है।
Verse 44 — Surah Qaf 50:44
जिस दिन फट जायेगी धरती उनसे, वे दौड़ते हुए (निकलेंगे), ये एकत्र करना हमपर बहुत सरल है।
Verse 45 — Surah Qaf 50:45
तथा हम भली-भाँति जानते हैं उसे, जो कुछ वे कर रहे हैं और आप उन्हें बलपूर्वक मनवाने के लिए नहीं हैं। तो आप शिक्षा दें क़ुर्आन द्वारा उसे, जो डरता हो मेरी यातना से।