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Hindi - Chapter 51 - Adh-Dhariyat
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Adh-Dhariyat 51:1
शपथ है (बादलों को) बिखेरने वालियों की
Verse 2 — Surah Adh-Dhariyat 51:2
फिर (बादलों का) बोझ लादने वालियों की
Verse 3 — Surah Adh-Dhariyat 51:3
फिर धीमी गति से चलने वालियों की
Verse 4 — Surah Adh-Dhariyat 51:4
फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)
Verse 5 — Surah Adh-Dhariyat 51:5
निश्चय जिस (प्रलय) से तुम्हें डराया जा रहा है, वह सच्ची है।
Verse 6 — Surah Adh-Dhariyat 51:6
तथा कर्मों का फल अवश्य मिलने वाला है।
Verse 7 — Surah Adh-Dhariyat 51:7
शपथ है रास्तों वाले आकाश की
Verse 8 — Surah Adh-Dhariyat 51:8
वास्तव में, तुम विभिन्न[1] बातों में हो।
Verse 9 — Surah Adh-Dhariyat 51:9
उससे वही फेर दिया जाता है, जो (सत्य से) फिरा हुआ हो।
Verse 10 — Surah Adh-Dhariyat 51:10
नाश कर दिये गये अनुमान लगाने वाले।
Verse 11 — Surah Adh-Dhariyat 51:11
जो अपनी अचेतना में भूले हुए हैं।
Verse 12 — Surah Adh-Dhariyat 51:12
वे प्रश्न[1] करते हैं कि प्रतिकार का दिन कब है
Verse 13 — Surah Adh-Dhariyat 51:13
(उस दिन है) जिस दिन वह अग्नि पर तपाये जायेंगे।
Verse 14 — Surah Adh-Dhariyat 51:14
(उनसे कहा जायेगाः) स्वाद चखो अपने उपद्रव का। यही वह है, जिसकी तुम शीघ्र माँग कर रहे थे।
Verse 15 — Surah Adh-Dhariyat 51:15
वास्तव में, आज्ञाकारी स्वर्गों तथा जल स्रोतों में होंगे।
Verse 16 — Surah Adh-Dhariyat 51:16
लेते हुए जो कुछ प्रदान किया है उनहें, उनके पालनहारन ने। वस्तुतः, वे इससे पहले (संसार में) सदाचारी थे।
Verse 17 — Surah Adh-Dhariyat 51:17
वे रात्रि में बहुत कम सोया करते थे।
Verse 18 — Surah Adh-Dhariyat 51:18
तथा भोरों[1] में क्षमा माँगते थे।
Verse 19 — Surah Adh-Dhariyat 51:19
और उनके धनों में माँगने वाले[1] तथा न पाने वाले का ह़क़ था।
Verse 20 — Surah Adh-Dhariyat 51:20
तथा धरती में बहुत-सी निशानियाँ हैं विश्वास करने वालों के लिए।
Verse 21 — Surah Adh-Dhariyat 51:21
तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। फिर क्यों तुम देखते नहीं
Verse 22 — Surah Adh-Dhariyat 51:22
और आकाश में तुम्हारी जीविका[1] है तथा जिसका तुम्हें वचन दिया जा रहा है।
Verse 23 — Surah Adh-Dhariyat 51:23
तो शपथ है आकाश एवं धरती के पालनहार की! ये (बात) ऐसे ही सच है, जैसे तुम बोल रहे हो।
Verse 24 — Surah Adh-Dhariyat 51:24
(हे नबी!) क्या आयी आपके पास इब्राहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना
Verse 25 — Surah Adh-Dhariyat 51:25
जब वे आये उसके पास, तो सलाम किया। इब्राहीम ने (भी) सलाम किया (तथा कहाः) अपरिचित लोग हैं।
Verse 26 — Surah Adh-Dhariyat 51:26
फिर चुपके से अपने परिजनों की ओर गया और एक मोटा (भुना हुआ) बछड़ा लाया।
Verse 27 — Surah Adh-Dhariyat 51:27
फिर रख दिया उनके पास, उसने कहाः तुम क्यों नहीं खाते हो
Verse 28 — Surah Adh-Dhariyat 51:28
फिर अपने दिल में उनसे कुछ डरा, उन्होंने कहाः डरो नहीं और उसे शुभ सूचना दी एक ज्ञानी पुत्र की।
Verse 29 — Surah Adh-Dhariyat 51:29
तो सामने आयी उसकी पत्नी और उसने मार लिया (आश्चर्य से) अपने मुँह पर हाथ तथा कहाः मैं बाँझ बुढ़िया हूँ।
Verse 30 — Surah Adh-Dhariyat 51:30
उन्होंने कहाः इसी प्रकार, तेरे पालनहार ने कहा है। वास्तव में, वह सब गुण और सब कुछ जानने वाला है।
Verse 31 — Surah Adh-Dhariyat 51:31
उस (इब्राहीम) ने कहाः तो तुम्हारा क्या अभियान है, हे भेजे हुए (फ़रिश्तो)
Verse 32 — Surah Adh-Dhariyat 51:32
उन्होंने कहाः वास्तव में, हम भेजे गये हैं एक अपरीधी जाति की ओर।
Verse 33 — Surah Adh-Dhariyat 51:33
ताकि हम बरसायें उनपर पत्थर की कंकरी।
Verse 34 — Surah Adh-Dhariyat 51:34
नामांकित[1] तुम्हारे पालनहार की ओर से उल्लंघनकारियों के लिए।
Verse 35 — Surah Adh-Dhariyat 51:35
फिर हमने निकाल दिया जो भी उस (बस्ती) में ईमान वाले थे।
Verse 36 — Surah Adh-Dhariyat 51:36
और हमने उसमें मोमिनों का केवल एक ही घर[1] पाया।
Verse 37 — Surah Adh-Dhariyat 51:37
तथा छोड़ दी हमने उस (बस्ती) में एक निशानी उनके लिए, जो डरते हों दुःखदायी यातना से।
Verse 38 — Surah Adh-Dhariyat 51:38
तथा मूसा (की कथा) में, जब हमने भेजा उसे फ़िरऔन की ओर प्रत्यक्ष (खुले) प्रमाण के साथ।
Verse 39 — Surah Adh-Dhariyat 51:39
तो वह विमुख हो गया अपने बल-बूते के कारण और कह दिया कि जादूगर अथवा पागल है।
Verse 40 — Surah Adh-Dhariyat 51:40
अन्ततः, हमने पकड़ लिया उसको तथा उसकी सेनाओं को, फिर फेंक दिया उन्हें सागर में और वह निन्दित होकर रह गया।
Verse 41 — Surah Adh-Dhariyat 51:41
तथा आद में (शिक्षाप्रद निशानी है)। जब हमने भेज दी उनपर बाँझ[1] आँधी।
Verse 42 — Surah Adh-Dhariyat 51:42
वह नहीं छोड़ती थी किसी वस्तु को जिसपर गुज़रती, परन्तु उसे बना देती थी जीर्ण चूर-चूर हड्डी के समान।
Verse 43 — Surah Adh-Dhariyat 51:43
तथा समूद में जब उनसे कहा गया कि लाभान्वित हो लो, एक निश्चित समय तक।
Verse 44 — Surah Adh-Dhariyat 51:44
तो उन्होंने अवज्ञा की अपने पालनहार के आदेश की, तो सहसा पकड़ लिया उन्हें कड़क ने और वे देखते रह गये।
Verse 45 — Surah Adh-Dhariyat 51:45
तो वे न खड़े हो सके और न (हमसे) बदला ले सके।
Verse 46 — Surah Adh-Dhariyat 51:46
तथा नूह़[1] की जाति को इससे पहले (याद करो)। वास्तव में, वे अवज्ञाकारी जाति थे।
Verse 47 — Surah Adh-Dhariyat 51:47
तथा आकाश को हमने बनाया है हाथों[1] से और हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।
Verse 48 — Surah Adh-Dhariyat 51:48
तथा धरती को हमने बिछाया है, तो हम क्या[1] ही अच्छे बिछाने वाले हैं।
Verse 49 — Surah Adh-Dhariyat 51:49
तथा प्रत्येक वस्तु को हमने उत्पन्न किया है जोड़ा, ताकि तुम शिक्षा ग्रहण करो।
Verse 50 — Surah Adh-Dhariyat 51:50
तो तुम दौड़ो अल्लाह की ओर, वास्तव में, मैं तुम्हें उसकी ओर से प्रत्यक्ष रूप से (खुला) सावधान कर ने वाला हूँ।
Verse 51 — Surah Adh-Dhariyat 51:51
और मत बनाओ अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य। वास्तव में, मैं तुम्हें इससे खुला सावधान करने वाला हूँ।
Verse 52 — Surah Adh-Dhariyat 51:52
इसी प्रकार नहीं आया उनके पास जो इन (मक्का वासियों) से पूर्व रहे कोई रसूल, परन्तु उन्होंने कहा कि जादूगर या पागल है।
Verse 53 — Surah Adh-Dhariyat 51:53
क्या वे एक-दूसरे को वसिय्यत[1] कर चुके हैं इसकी? बल्कि वे उल्लंघनकारी लोग हैं।
Verse 54 — Surah Adh-Dhariyat 51:54
तो आप मुख फेर लें उनसे। आपकी कोई निन्दा नहीं है।
Verse 55 — Surah Adh-Dhariyat 51:55
और आप शिक्षा देते रहें। इसलिए कि शिक्षा लाभप्रद है इमान वालों के लिए।
Verse 56 — Surah Adh-Dhariyat 51:56
और नहीं उत्पन्न किया है मैंने जिन्न तथा मनुष्य को, परन्तु ताकि मेरी ही इबादत करें।
Verse 57 — Surah Adh-Dhariyat 51:57
मैं नहीं चाहता हूँ उनसे कोई जीविका और न चाहता हूँ कि वे मुझे खिलायें।
Verse 58 — Surah Adh-Dhariyat 51:58
अवश्य अल्लाह ही जीविका दाता, शक्तिशाली, बलवान् है।
Verse 59 — Surah Adh-Dhariyat 51:59
तो इन अत्याचारियों के पाप हैं इनके साथियों के पापों के समान, अतः उतावले न बनें।
Verse 60 — Surah Adh-Dhariyat 51:60
अन्ततः, विनाश है काफ़िरों के लिए उनके उस दिन[1] से, जिससे हे डराये जा रहे हैं।