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Hindi - Chapter 56 - Al-Waqiah

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Waqiah 56:1

जब होने वाली, हो जायेगी।

Verse 2 — Surah Al-Waqiah 56:2

उसका होना कोई झूठ नहीं है।

Verse 3 — Surah Al-Waqiah 56:3

नीचा-ऊँचा करने[1] वाली।

Verse 4 — Surah Al-Waqiah 56:4

जब धरती तेज़ी से डोलने लगेगी।

Verse 5 — Surah Al-Waqiah 56:5

और चूर-चूर कर दिये जायेंगे पर्वत।

Verse 6 — Surah Al-Waqiah 56:6

फिर हो जायेंगे बिखरी हुई धूल।

Verse 7 — Surah Al-Waqiah 56:7

तथा तुम हो जाओगे तीन समूह।

Verse 8 — Surah Al-Waqiah 56:8

तो दायें वाले, तो क्या हैं दायें वाले

Verse 9 — Surah Al-Waqiah 56:9

और बायें वाले, तो क्या हैं बायें वाले

Verse 10 — Surah Al-Waqiah 56:10

और अग्रगामी तो अग्रगामी ही हैं।

Verse 11 — Surah Al-Waqiah 56:11

वही समीप किये[1] हुए हैं।

Verse 12 — Surah Al-Waqiah 56:12

वे सुखों के स्वर्गों में होंगे।

Verse 13 — Surah Al-Waqiah 56:13

बहुत-से अगले लोगों में से।

Verse 14 — Surah Al-Waqiah 56:14

तथा कुछ पिछले लोगों में से होंगे।

Verse 15 — Surah Al-Waqiah 56:15

स्वर्ण से बुने हुए तख़्तों पर।

Verse 16 — Surah Al-Waqiah 56:16

तकिये लगाये उनपर, एक-दूसरे के सम्मुख (आसीन) होंगे।

Verse 17 — Surah Al-Waqiah 56:17

फिरते होंगे उनकी सेवा के लिए बालक, जो सदा (बालक) रहेंगे।

Verse 18 — Surah Al-Waqiah 56:18

प्याले तथा सुराह़ियाँ लेकर तथा मदिरा के छलकते प्याले।

Verse 19 — Surah Al-Waqiah 56:19

न तो सिर चकरायेगा उनसे, न वे निर्बोध होंगे।

Verse 20 — Surah Al-Waqiah 56:20

तथा जो फल वे चाहेंगे।

Verse 21 — Surah Al-Waqiah 56:21

तथा पक्षी का जो मांस वे चाहेंगे।

Verse 22 — Surah Al-Waqiah 56:22

और गोरियाँ बड़े नैनों वाली।

Verse 23 — Surah Al-Waqiah 56:23

छुपाकर रखी हुईं मोतियों के समान।

Verse 24 — Surah Al-Waqiah 56:24

उसके बदले, जो वे (संसार में) करते रहे।

Verse 25 — Surah Al-Waqiah 56:25

नहीं सुनेंगे उनमें व्यर्थ बात और न पाप की बात।

Verse 26 — Surah Al-Waqiah 56:26

केवल सलाम ही सलाम की ध्वनि होगी।

Verse 27 — Surah Al-Waqiah 56:27

और दायें वाले, क्या (ही भाग्यशाली) हैं दायें वाले

Verse 28 — Surah Al-Waqiah 56:28

बिन काँटे की बैरी में होंगे।

Verse 29 — Surah Al-Waqiah 56:29

तथा तह पर तह केलों में।

Verse 30 — Surah Al-Waqiah 56:30

फैली हुई छाया[1] में।

Verse 31 — Surah Al-Waqiah 56:31

और प्रवाहित जल में।

Verse 32 — Surah Al-Waqiah 56:32

तथा बहुत-से फलों में।

Verse 33 — Surah Al-Waqiah 56:33

जो न समाप्त होंगे, न रोके जायेंगे।

Verse 34 — Surah Al-Waqiah 56:34

और ऊँचे बिस्तर पर।

Verse 35 — Surah Al-Waqiah 56:35

हमने बनाया है (उनकी) पत्नियों को एक विशेष रूप से।

Verse 36 — Surah Al-Waqiah 56:36

हमने बनाय है उन्हें कुमारियाँ।

Verse 37 — Surah Al-Waqiah 56:37

प्रेमिकायें समायु।

Verse 38 — Surah Al-Waqiah 56:38

दाहिने वालों के लिए।

Verse 39 — Surah Al-Waqiah 56:39

बहुत-से अगलों में से होंगे।

Verse 40 — Surah Al-Waqiah 56:40

तथा बहुत-से पिछलों में से।

Verse 41 — Surah Al-Waqiah 56:41

और बायें वाले, तो क्या हैं बायें वाले

Verse 42 — Surah Al-Waqiah 56:42

वे गर्म वायु तथा खौलते जल में (होंगे)।

Verse 43 — Surah Al-Waqiah 56:43

तथा काले धुवें की छाया में।

Verse 44 — Surah Al-Waqiah 56:44

जो न शीतल होगा और न सुखद।

Verse 45 — Surah Al-Waqiah 56:45

वास्तव में, वे इससे पहले (संसार में) सम्पन्न (सुखी) थे।

Verse 46 — Surah Al-Waqiah 56:46

तथा दुराग्रह करते थे महा पापों पर।

Verse 47 — Surah Al-Waqiah 56:47

तथा कहा करते थे कि क्या जब हम मर जायेंगे तथा हो जायेंगे धूल और अस्थियाँ, तो क्या हम अवश्य पुनः जीवित होंगे

Verse 48 — Surah Al-Waqiah 56:48

और क्या हमारे पूर्वज (भी)

Verse 49 — Surah Al-Waqiah 56:49

आप कह दें कि निःसंदेह सब अगले तथा पिछले।

Verse 50 — Surah Al-Waqiah 56:50

अवश्य एकत्र किये जायेंगे एक निर्धारित दिन के समय।

Verse 51 — Surah Al-Waqiah 56:51

फिर तुम, हे कुपथो! झुठलाने वालो

Verse 52 — Surah Al-Waqiah 56:52

अवश्य खाने वाले हो ज़क़्क़ूम (थोहड़) के वृक्ष से।

Verse 53 — Surah Al-Waqiah 56:53

तथा भरने वाले हो उससे (अपने) उदर।

Verse 54 — Surah Al-Waqiah 56:54

तथा पीने वाले हो उसपर से खौलता जल।

Verse 55 — Surah Al-Waqiah 56:55

फिर पीने वाले हो प्यासे[1] ऊँट के समान।

Verse 56 — Surah Al-Waqiah 56:56

यही उनका अतिथि सत्कार है, प्रतिकार (प्रलय) के दिन।

Verse 57 — Surah Al-Waqiah 56:57

हमने ही उत्पन्न किया है तुम्हें, फिर तुम विश्वास क्यों नहीं करते

Verse 58 — Surah Al-Waqiah 56:58

क्या तुमने ये विचार किया कि जो वीर्य तुम (गर्भाशयों में) गिराते हो।

Verse 59 — Surah Al-Waqiah 56:59

क्या तुम उसे शिशु बनाते हो या हम बनाने वाले हैं

Verse 60 — Surah Al-Waqiah 56:60

हमने निर्धारित किया है तुम्हारे बीच मरण को तथा हम विवश होने वाले नहीं हैं।

Verse 61 — Surah Al-Waqiah 56:61

कि बदल दें तुम्हारे रूप और तुम्हें बना दें उस रूप में, जिसे तुम नहीं जानते।

Verse 62 — Surah Al-Waqiah 56:62

तथा तुमने तो जान लिया है प्रथम उत्पत्ति को फिर तुम शिक्षा ग्रहण क्यों नहीं करते

Verse 63 — Surah Al-Waqiah 56:63

फिर क्या तुमने विचार किया कि उसमें जो तुम बोते हो

Verse 64 — Surah Al-Waqiah 56:64

क्या तुम उसे उगाते हो या हम उसे उगाने वाले हैं

Verse 65 — Surah Al-Waqiah 56:65

यदि हम चाहें, तो उसे भुस बना दें, फिर तुम बातें बनाते रह जाओ।

Verse 66 — Surah Al-Waqiah 56:66

वस्तुतः, हम दण्डित कर दिये गये।

Verse 67 — Surah Al-Waqiah 56:67

बल्कि हम (जीविका से) वंचित कर दिये गये।

Verse 68 — Surah Al-Waqiah 56:68

फिर तुमने विचार किया उस पानी में, जो तुम पीते हो

Verse 69 — Surah Al-Waqiah 56:69

क्या तुमने उसे बरसाया है बादल से अथवा हम उसे बरसाने वाले हैं।

Verse 70 — Surah Al-Waqiah 56:70

यदि हम चाहें, तो उसे खारी कर दें, फिर तुम आभारी (कृतज्ञ) क्यों नहीं होते

Verse 71 — Surah Al-Waqiah 56:71

क्या तुमने उस अग्नि को देखा, जिसे तुम सुलगाते हो।

Verse 72 — Surah Al-Waqiah 56:72

क्या तुमने उत्पन्न किया है उसके वृक्ष को या हम उत्पन्न करने वाले हैं

Verse 73 — Surah Al-Waqiah 56:73

हमने ही बनाया उसे शिक्षाप्रद तथा यात्रियों के लाभदायक।

Verse 74 — Surah Al-Waqiah 56:74

अतः, (हे नबी!) आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महा पालनहार के नाम की।

Verse 75 — Surah Al-Waqiah 56:75

मैं शपथ लेता हूँ सितारों के स्थानों की

Verse 76 — Surah Al-Waqiah 56:76

और ये निश्चय एक बड़ी शपथ है, यदि तुम समझो।

Verse 77 — Surah Al-Waqiah 56:77

वास्तव में, ये आदरणीय[1] क़ुर्आन है।

Verse 78 — Surah Al-Waqiah 56:78

सुरक्षित[1] पुस्तक में।

Verse 79 — Surah Al-Waqiah 56:79

इसे पवित्र लोग ही छूते हैं।

Verse 80 — Surah Al-Waqiah 56:80

अवतरित किया गया है सर्वलोक के पालनहार की ओर से।

Verse 81 — Surah Al-Waqiah 56:81

फिर क्या तुम इस वाणि (क़ुर्आन) की अपेक्षा करते हो

Verse 82 — Surah Al-Waqiah 56:82

तथा बनाते हो अपना भाग कि इसे तुम झुठलाते हो

Verse 83 — Surah Al-Waqiah 56:83

फिर क्यों नहीं जब प्राण गले को पहुँचते हैं।

Verse 84 — Surah Al-Waqiah 56:84

और तुम उस समय देखते रहते हो।

Verse 85 — Surah Al-Waqiah 56:85

तथा हम अधिक समीप होते हैं उसके तुमसे, परन्तु तुम नहीं देख सकते।

Verse 86 — Surah Al-Waqiah 56:86

तो यदि तुम किसी के आधीन न हो।

Verse 87 — Surah Al-Waqiah 56:87

तो उस (प्राण) को फेर क्यों नहीं लाते, यदि तुम सच्चे हो

Verse 88 — Surah Al-Waqiah 56:88

फिर यदि वह (प्राणी) समीपवर्तियों में है।

Verse 89 — Surah Al-Waqiah 56:89

तो उसके लिए सुख तथा उत्तम जीविका तथा सुख भरा स्वर्ग है।

Verse 90 — Surah Al-Waqiah 56:90

और यदि वह दायें वालों में से है।

Verse 91 — Surah Al-Waqiah 56:91

तो सलाम है तेरे लिए दायें वालों में होने के कारण।

Verse 92 — Surah Al-Waqiah 56:92

और यदि वह है झुठलाने वाले कुपथों में से।

Verse 93 — Surah Al-Waqiah 56:93

तो अतिथि सत्कार है खौलते पानी से।

Verse 94 — Surah Al-Waqiah 56:94

तथा नरक में प्रवेश।

Verse 95 — Surah Al-Waqiah 56:95

वास्तव में, यही निश्चय सत्य है।

Verse 96 — Surah Al-Waqiah 56:96

अतः, (हे नबी!) आप पवित्रता का वर्णन करें अपने महा पालनहार के नाम की।