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Hindi - Chapter 71 - Nuh

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Nuh 71:1

निःसंदेह, हमने भेजा नूह़ को उसकी जाति की ओर कि सावधान कर अपनी जाति को, इससे पूर्व कि आये उनके पास, दूःखदायी यातना।

Verse 2 — Surah Nuh 71:2

उसने कहाः हे मेरी जाति! वास्तव में, मैं खुला सावधान करने वाला हूँ, तुम्हें।

Verse 3 — Surah Nuh 71:3

कि इबादत (वंदना) करो अल्लाह की तथा डरो उससे और बात मानो मेरी।

Verse 4 — Surah Nuh 71:4

वह क्षमा कर देगा तुमहारे लिए तुम्हारे पापों को तथा अवसर देगा तुम्हें निर्धारित समय[1] तक। वास्तव में, जब अल्लाह का निर्धारित समय आ जायेगा, तो उसमें देर न होगी। काश तुम जानते

Verse 5 — Surah Nuh 71:5

नूह़ ने कहाः मेरे पालनहार! मैंने बुलाया अपनी जाति को (तेरी ओर) रात और दिन।

Verse 6 — Surah Nuh 71:6

तो मेरे बुलावे ने उनके भागने ही को अधिक किया।

Verse 7 — Surah Nuh 71:7

और मैंने जब-जब उन्हें बुलाया, तो उन्होंने दे लीं अपनी उँगलियाँ अपने कानों में तथा ओढ़ लिए अपने कपड़े[1] तथा अड़े रह गये और बड़ा घमण्ड किया।

Verse 8 — Surah Nuh 71:8

फिर मैंने उन्हें उच्च स्वर में बुलाया।

Verse 9 — Surah Nuh 71:9

फिर मैंने उनसे खुलकर कहा और उनसे धीरे-धीरे (भी) कहा।

Verse 10 — Surah Nuh 71:10

मैंने कहाः क्षमा माँगो अपने पालनहार से, वास्तव में वह बड़ा क्षमाशील है।

Verse 11 — Surah Nuh 71:11

वह वर्षा करेगा आकाश से तुमपर धाराप्रवाह वर्षा।

Verse 12 — Surah Nuh 71:12

तथा अधिक देगा तुम्हें पुत्र तथा धन और बना देगा तुम्हारे लिए बाग़ तथा नहरें।

Verse 13 — Surah Nuh 71:13

क्या हो गया है तुम्हें कि नहीं डरते हो अल्लाह की महिमा से

Verse 14 — Surah Nuh 71:14

जबकि उसने पैदा किया है तुम्हें विभिन्न प्रकार[1] से।

Verse 15 — Surah Nuh 71:15

क्या तुमने नहीं देखा कि कैसे पैदा किये हैं अल्लाह ने सात आकाश, ऊपर-तले

Verse 16 — Surah Nuh 71:16

और बनाया है चन्द्रमा को उनमें प्रकाश और बनाया है सूर्य को प्रदीप।

Verse 17 — Surah Nuh 71:17

और अल्लाह ही ने उगाया है तुम्हें धरती[1] से अद्भुत रूप से।

Verse 18 — Surah Nuh 71:18

फिर वह वापस ले जायेगा तुम्हें उसमें और निकालेगा तुम्हें उससे।

Verse 19 — Surah Nuh 71:19

और अल्लाह ने बनाया है तुम्हारे लिए धरती को बिस्तर।

Verse 20 — Surah Nuh 71:20

ताकि तुम चलो उसकी खुली राहों में।

Verse 21 — Surah Nuh 71:21

नूह ने निवेदन कियाः मेरे पालनहार! उन्होंने मेरी अवज्ञा की और अनुसरण किया उसका[1] जिसके धन और संतान ने उसकी क्षति ही को बढ़ाया।

Verse 22 — Surah Nuh 71:22

और उन्होंने बड़ी चाल चली।

Verse 23 — Surah Nuh 71:23

और उन्होंने कहाः तुम कदापि न छोड़ना अपने पूज्यों को और कदापि न छोड़ना वद्द को, न सुवाअ को और न यग़ूस को और न यऊक़ को तथा न नस्र[1] को।

Verse 24 — Surah Nuh 71:24

और कुपथ (गुमराह) कर दिया है उन्होंने बहुतों को और अधिक कर दे तू भी अत्याचारियों के कुपथ[1] (कुमार्ग) को।

Verse 25 — Surah Nuh 71:25

वे अपने पापों के कारण डुबो दिये गये, फिर पहुँचा दिये गये नरक में और नहीं पाया उन्होंने अपने लिए अल्लाह के मुक़ाबले में कोई सहायक।

Verse 26 — Surah Nuh 71:26

तथा कहा नूह़ नेः मेरे पालनहार! न छोड़ धरती पर काफ़िरों का कोई घराना।

Verse 27 — Surah Nuh 71:27

क्योंकि यदि तू उन्हें छोड़ेगा, तो वे कुपथ करेंगे तेरे भक्तों को और नहीं जन्म देंगे, परन्तु दुष्कर्मी, बड़े काफ़िर को।

Verse 28 — Surah Nuh 71:28

मेर पालनहार! क्षमा कर दे मुझे तथा मेरे माता-पिता को और उसे, जो प्रवेश करे मेरे घर में ईमान लाकर तथा ईमान वालों और ईमान वालियों को तथा काफ़िरों के विनाश ही को अधिक कर।