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Hindi - Chapter 70 - Al-Maarij
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Maarij 70:1
प्रश्न किया एक प्रश्न करने[1] वाले ने उस यातना के बारे में, जो आने वाली है।
Verse 2 — Surah Al-Maarij 70:2
काफ़िरों पर। नहीं है जिसे कोई दूर करने वाला।
Verse 3 — Surah Al-Maarij 70:3
अल्लाह ऊँचाईयों वाले की ओर से।
Verse 4 — Surah Al-Maarij 70:4
चढ़ते हैं फ़रिश्ते तथा रूह़[1] जिसकी ओर, एक दिन में, जिसका माप पचास हज़ार वर्ष है।
Verse 5 — Surah Al-Maarij 70:5
अतः, (हे नबी!) आप सहन[1] करें अच्छे प्रकार से।
Verse 6 — Surah Al-Maarij 70:6
वे समझते हैं उसे दूर।
Verse 7 — Surah Al-Maarij 70:7
और हम देख रहे हैं उसे समीप।
Verse 8 — Surah Al-Maarij 70:8
जिस दिन हो जायेगा आकाश पिघली हुई धातु के समान।
Verse 9 — Surah Al-Maarij 70:9
तथा हो जायेंगे पर्वत, रंगारंग धुने हुए ऊन के समान।
Verse 10 — Surah Al-Maarij 70:10
और नहीं पूछेगा कोई मित्र किसी मित्र को।
Verse 11 — Surah Al-Maarij 70:11
(जबकि) वे उन्हें दिखाये जायेंगे। कामना करेगा पापी कि दण्ड के रूप में दे दे, उस दिन की यातना के, अपने पुत्रों को।
Verse 12 — Surah Al-Maarij 70:12
तथा अपनी पत्नी और अपने भाई को।
Verse 13 — Surah Al-Maarij 70:13
तथा अपने समीपवर्ती परिवार को, जो उसे शरण देता था।
Verse 14 — Surah Al-Maarij 70:14
और जो धरती में है, सभी[1] को, फिर वह उसे यातना से बचा ले।
Verse 15 — Surah Al-Maarij 70:15
कदापि (ऐसा) नहीं (होगा)।
Verse 16 — Surah Al-Maarij 70:16
वह अग्नि की ज्वाला होगी।
Verse 17 — Surah Al-Maarij 70:17
खाल उधेड़ने वाली।
Verse 18 — Surah Al-Maarij 70:18
वह पुकारेगी उसे, जिसने पीछा दिखाया[1] तथा मुँह फेरा।
Verse 19 — Surah Al-Maarij 70:19
तथा (धन) एकत्र किया, फिर सौंत कर रखा।
Verse 20 — Surah Al-Maarij 70:20
वास्तव में, मनुष्य अत्यंत कच्चे दिल का पैदा किया गया है।
Verse 21 — Surah Al-Maarij 70:21
जब उसे पहुँचता है दुःख, तो उद्विग्न हो जाता है।
Verse 22 — Surah Al-Maarij 70:22
और जब उसे धन मिलता है, तो कंजूसी करने लगता है।
Verse 23 — Surah Al-Maarij 70:23
परन्तु, जो नमाज़ी हैं।
Verse 24 — Surah Al-Maarij 70:24
जो अनपी नमाज़ का सदा पालन[1] करते हैं।
Verse 25 — Surah Al-Maarij 70:25
और जिनके धनों में निश्चित भाग है, याचक (माँगने वाला) तथा वंचित[1] का।
Verse 26 — Surah Al-Maarij 70:26
तथा जो सत्य मानते हैं प्रतिकार (प्रलय) के दिन को।
Verse 27 — Surah Al-Maarij 70:27
तथा जो अपने पालनहार की यातना से डरते हैं।
Verse 28 — Surah Al-Maarij 70:28
वास्तव में, आपके पालनहार की यातना निर्भय रहने योग्य नहीं है।
Verse 29 — Surah Al-Maarij 70:29
तथा जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करने वाले हैं।
Verse 30 — Surah Al-Maarij 70:30
सिवाय अपनी पत्नियों और अपने स्वामित्व में आये दासियों[1] के, तो वही निन्दित नहीं हैं।
Verse 31 — Surah Al-Maarij 70:31
और जो चाहे इसके अतिरिक्त, तो वही सीमा का उल्लंघन करने वाले हैं।
Verse 32 — Surah Al-Maarij 70:32
और जो अपनी अमानतों तथा अपने वचन का पालन करते हैं।
Verse 33 — Surah Al-Maarij 70:33
और जो अपने साक्ष्यों (गवाहियों) पर स्थित रहने वाले हैं।
Verse 34 — Surah Al-Maarij 70:34
तथा जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं।
Verse 35 — Surah Al-Maarij 70:35
वही स्वर्गों में सम्मानित होंगे।
Verse 36 — Surah Al-Maarij 70:36
तो क्या हो गया है उनकाफ़िरों को कि आपकी ओर दौड़े चले आ रहे हैं
Verse 37 — Surah Al-Maarij 70:37
दायें तथा बायें समूहों में होकर।
Verse 38 — Surah Al-Maarij 70:38
क्या उनमें से प्रत्येक व्यक्ति लोभ (लालच) रखता है कि उसे प्रवेश दे दिया जायेगा सुख के स्वर्गों में
Verse 39 — Surah Al-Maarij 70:39
कदापि ऐसा न होगा, हमने उनकी उत्पत्ति उस चीज़ से की है, जिसे वे[1] जानते हैं।
Verse 40 — Surah Al-Maarij 70:40
तो मैं शपथ लेता हूँ पूर्वों (सूर्योदय के स्थानों) तथा पश्चिमों (सूर्यास्त के स्थानों) की, वास्तव में हम अवश्य सामर्थ्यवान हैं।
Verse 41 — Surah Al-Maarij 70:41
इस बात पर कि बदल दें उनसे उत्तम (उत्पत्ति) को तथा हम विवश नहीं हैं।
Verse 42 — Surah Al-Maarij 70:42
अतः, आप उन्हें झगड़ते तथा खेलते छोड़ दें, यहाँ तक कि वे मिल जायें अपने उस दिन से, जिसका उन्हें वचन दिया जा रहा है।
Verse 43 — Surah Al-Maarij 70:43
जिस दिन वे निकलेंगे क़ब्रों (और समाधियों) से, दौड़ते हुए, जैसे वे अपनी मूर्तियों की ओर दौड़ रहे हों।
Verse 44 — Surah Al-Maarij 70:44
झुकी होंगी उनकी आँखें, छाया होगा उनपर अपमान, यही वह दिन है जिसका वचन उन्हें दिया जा[1] रहा था।