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Hindi - Chapter 74 - Al-Muddaththir

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Muddaththir 74:1

हे चादर ओढ़ने[1] वाले

Verse 2 — Surah Al-Muddaththir 74:2

खड़े हो जाओ, फिर सावधान करो।

Verse 3 — Surah Al-Muddaththir 74:3

तथा अपने पालनहार की महिमा का वर्णन करो।

Verse 4 — Surah Al-Muddaththir 74:4

तथा अपने कपड़ों को पवित्र रखो।

Verse 5 — Surah Al-Muddaththir 74:5

और मलीनता को त्याग दो।

Verse 6 — Surah Al-Muddaththir 74:6

तथा उपकार न करो इसलिए कि उसके द्वारा अधिक लो।

Verse 7 — Surah Al-Muddaththir 74:7

और अपने पालनहार ही के लिए सहन करो।

Verse 8 — Surah Al-Muddaththir 74:8

फिर जब फूँका जायेगा[1] नरसिंघा में।

Verse 9 — Surah Al-Muddaththir 74:9

तो उस दिन अति भीषण दिन होगा।

Verse 10 — Surah Al-Muddaththir 74:10

काफ़िरों पर सरल न होगा।

Verse 11 — Surah Al-Muddaththir 74:11

आप छोड़ दें मुझे और उसे, जिसे मैंने पैदा किया अकेला।

Verse 12 — Surah Al-Muddaththir 74:12

फिर दे दिया उसे अत्यधिक धन।

Verse 13 — Surah Al-Muddaththir 74:13

और पुत्र उपस्थित रहने[1] वाले।

Verse 14 — Surah Al-Muddaththir 74:14

और दिया मैंने उसे प्रत्येक प्रकार का संसाधन।

Verse 15 — Surah Al-Muddaththir 74:15

फिर भी वह लोभ रखता है कि उसे और अधिक दूँ।

Verse 16 — Surah Al-Muddaththir 74:16

कदापि नहीं। वह हमारी आयतों का विरोधी है।

Verse 17 — Surah Al-Muddaththir 74:17

मैं उसे चढ़ाऊँगा कड़ी[1] चढ़ाई।

Verse 18 — Surah Al-Muddaththir 74:18

उसने विचार किया और अनुमान लगाया।

Verse 19 — Surah Al-Muddaththir 74:19

वह मारा जाये! फिर उसने कैसा अनुमान लगाया

Verse 20 — Surah Al-Muddaththir 74:20

फिर (उसपर अल्लाह की) मार! उसने कैसा अनुमान लगाया

Verse 21 — Surah Al-Muddaththir 74:21

फिर पुनः विचार किया।

Verse 22 — Surah Al-Muddaththir 74:22

फिर माथे पर बल दिया और मुँह बिदोरा।

Verse 23 — Surah Al-Muddaththir 74:23

फिर (सत्य से) पीछे फिरा और घमंड किया।

Verse 24 — Surah Al-Muddaththir 74:24

और बोला कि ये तो पहले से चला आ रहा है, एक जादू है।

Verse 25 — Surah Al-Muddaththir 74:25

ये तो बस मनुष्य[1] का कथन है।

Verse 26 — Surah Al-Muddaththir 74:26

मैं उसे शीघ्र ही नरक में झोंक दूँगा।

Verse 27 — Surah Al-Muddaththir 74:27

और आप क्या जानें कि नरक क्या है।

Verse 28 — Surah Al-Muddaththir 74:28

न शेष रखेगी और न छोड़ेगी।

Verse 29 — Surah Al-Muddaththir 74:29

वह खाल झुलसा देने वाली।

Verse 30 — Surah Al-Muddaththir 74:30

नियुक्त हैं उनपर उन्नीस (रक्षख फ़रिश्ते)।

Verse 31 — Surah Al-Muddaththir 74:31

और हमने नरक के रक्षक फ़रिश्ते ही बनाये हैं और उनकी संख्या को काफ़िरों के लिए परीक्षा बना दिया गया है। ताकि विश्वास कर लें अह्ले[1] किताब और बढ़ें जो ईमान लाये हैं ईमान में और संदेह न करें जो पुस्तक दिये गये हैं और ईमान वाले और ताकि कहें वे जिनके दिलों में (द्विधा का) रोग है तथा काफ़िर[2] कि क्या तात्पर्य है अल्लाह का इस उदाहरण से? ऐसे ही कुपथ करता है अल्लाह जिसे चाहता है और संमार्ग दर्शाता है, जिसे चाहता है और नहीं जानता है आपके पालनहार की सेनाओं को उसके सिवा कोई और तथा नहीं है ये नरक की चर्चा, किन्तु मनुष्य की शिक्षा के लिए।

Verse 32 — Surah Al-Muddaththir 74:32

ऐसी बात नहीं, शपथ है चाँद की

Verse 33 — Surah Al-Muddaththir 74:33

तथा रात्रि की, जब व्यतीत होने लगे

Verse 34 — Surah Al-Muddaththir 74:34

और प्रातः की, जब प्रकाशित हो जाये

Verse 35 — Surah Al-Muddaththir 74:35

वास्तव में, (नरक) एक[1] बहुत बड़ी चीज़ है।

Verse 36 — Surah Al-Muddaththir 74:36

डराने के लिए लोगों को।

Verse 37 — Surah Al-Muddaththir 74:37

उसके लिए तुममें से, जो चाहे[1] आगे होना अथवा पीछे रहना।

Verse 38 — Surah Al-Muddaththir 74:38

प्रत्येक प्राणी अपने कर्मों के बदले में बंधक है।

Verse 39 — Surah Al-Muddaththir 74:39

दाहिने वालों के सिवा।

Verse 40 — Surah Al-Muddaththir 74:40

वे स्वर्गों में होंगे। वे प्रश्न करेंगे।

Verse 41 — Surah Al-Muddaththir 74:41

अपराधियों से।

Verse 42 — Surah Al-Muddaththir 74:42

तुम्हें क्या चीज़ ले गयी नरक में।

Verse 43 — Surah Al-Muddaththir 74:43

वे कहेंगेः हम नहीं थे नमाज़ियों में से।

Verse 44 — Surah Al-Muddaththir 74:44

और नहीं भोजन कराते थे निर्धन को।

Verse 45 — Surah Al-Muddaththir 74:45

तथा कुरेद करते थे कुरेद करने वालों के साथ।

Verse 46 — Surah Al-Muddaththir 74:46

और हम झुठलाया करते थे प्रतिफल के दिन (प्रलय) को।

Verse 47 — Surah Al-Muddaththir 74:47

यहाँ तक कि हमारी मौत आ गई।

Verse 48 — Surah Al-Muddaththir 74:48

तो उन्हें लाभ नहीं देगी शिफ़ारिशियों (अभिस्तावकों) की शिफ़ारिश।

Verse 49 — Surah Al-Muddaththir 74:49

तो उन्हें क्या हो गया है कि इस शिक्षा (क़ुर्आन) से मुँह फेर रहे हैं

Verse 50 — Surah Al-Muddaththir 74:50

मानो वे (जंगली) गधे हैं, बिदकाये हुए।

Verse 51 — Surah Al-Muddaththir 74:51

जो शिकारी से भागे हैं।

Verse 52 — Surah Al-Muddaththir 74:52

बल्कि चाहता है प्रत्येक व्यक्ति उनमें से कि उसे खुली[1] पुस्तक दी जाये।

Verse 53 — Surah Al-Muddaththir 74:53

कदापि ये नहीं (हो सकता) बल्कि वे आख़िरत (परलोक) से नहीं डरते हैं।

Verse 54 — Surah Al-Muddaththir 74:54

निश्चय ये (क़ुर्आन) तो एक शिक्षा है।

Verse 55 — Surah Al-Muddaththir 74:55

अब जो चाहे, शिक्षा ग्रहण करे।

Verse 56 — Surah Al-Muddaththir 74:56

और वे शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकते, परन्तु ये कि अल्लाह चाह ले। वही योग्य है कि उससे डरा जाये और योग्य है कि क्षमा कर दे।