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Hindi - Chapter 76 - Al-Insan
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Insan 76:1
क्या व्यतीत हुआ मनुष्य पर युग का एक समय, जब वह कोई विचर्चित[1] वस्तु न था
Verse 2 — Surah Al-Insan 76:2
हमने ही पैदा किया मनुष्य को मिश्रित (मिले हुए) वीर्य[1] से, ताकि उसकी परीक्षा लें और बनाया उसे सुनने तथा देखने वाला।
Verse 3 — Surah Al-Insan 76:3
हमने उसे राह दर्शा दी।[1] (अब) वह चाहे तो कृतज्ञ बने अथवा कृतघ्न।
Verse 4 — Surah Al-Insan 76:4
निःसंदेह, हमने तैयार की काफ़िरों (कृतघ्नों) के लिए ज़ंजीर तथा तौक़ और दहकती अग्नि।
Verse 5 — Surah Al-Insan 76:5
निश्चय सदाचारी (कृतज्ञ) पियेंगे ऐसे प्याले से जिसमें कपूर मिश्रित होगा।
Verse 6 — Surah Al-Insan 76:6
ये एक स्रोत होगा, जिससे अल्लाह के भक्त पियेंगे। उसे बहा ले जायेंगे (जहाँ चाहेंगे)।
Verse 7 — Surah Al-Insan 76:7
जो (संसार में) पूरी करते रहे मनोतियाँ[1] और डरते रहे उस दिन से[2] जिसकी आपदा चारों ओर फैली हुई होगी।
Verse 8 — Surah Al-Insan 76:8
और भोजन कराते रहे उस (भोजन) को प्रेम करने के बावजूद, निर्धन, अनाथ और बंदी को।
Verse 9 — Surah Al-Insan 76:9
(अपने मन में ये सोचकर) हम तुम्हें भोजन कराते हैं केवल अल्लाह की प्रसन्नता के लिए। तुमसे नहीं चाहते हैं कोई बदला और न कोई कृतज्ञता।
Verse 10 — Surah Al-Insan 76:10
हम डरते हैं अपने पालनहार से, उस दिन से, जो अति भीषण तथा घोर होगा।
Verse 11 — Surah Al-Insan 76:11
तो बचा लिया अल्लाह ने उन्हें उस दिन की आपदा से और प्रदान कर दिया प्रफुल्लता तथा प्रसन्नता।
Verse 12 — Surah Al-Insan 76:12
और उन्हें प्रतिफल दिया उनके धैर्य के बदले स्वर्ग तथा रेशमी वस्त्र।
Verse 13 — Surah Al-Insan 76:13
वे तकिये लगाये उसमें तख़्तों पर बैठे होंगे। न उसमें धूप देखेंगे न कड़ा शीत।
Verse 14 — Surah Al-Insan 76:14
और झुके होंगे उनपर उस (स्वर्ग) के साये और बस में किये होंगे उसके फलों के गुच्छे पूर्णतः।
Verse 15 — Surah Al-Insan 76:15
तथा फिराये जायेंगे उनपर चाँदी के बर्तन तथा प्याले जो शीशों के होंगे।
Verse 16 — Surah Al-Insan 76:16
चाँदी के शीशों के, जो एक अनुमान से भरेंगे।
Verse 17 — Surah Al-Insan 76:17
और पिलाये जायेंगे उसमें ऐसे भरे प्याले, जिसमें सोंठ मिली होगी।
Verse 18 — Surah Al-Insan 76:18
ये एक स्रोत है उस (स्वर्ग) में, जिसका नाम सलसबील है।
Verse 19 — Surah Al-Insan 76:19
और (सेवा के लिए) फिर रहे होंगे उनपर सदावासी बालक, जब तुम उन्हें देखोगे, तो उन्हें समझोगे कि बिखरे हुए मोती हैं।
Verse 20 — Surah Al-Insan 76:20
तथा जब तुम वहाँ देखोगे, तो देखोगे बड़ा सुख तथा भारी राज्य।
Verse 21 — Surah Al-Insan 76:21
उनके ऊपर रेशमी हरे महीन तथा दबीज वस्त्र होंगे और पहनाये जायेंगे उन्हें चाँदी के कंगन और पिलायेगा उन्हें उनका पालनहार पवित्र पेय।
Verse 22 — Surah Al-Insan 76:22
(तथा कहा जायेगाः) यही है तुम्हारे लिए प्रतिफल और तुम्हारे प्रयास का आदर किया गया।
Verse 23 — Surah Al-Insan 76:23
वास्तव में, हमने ही उतारा है आपपर क़ुर्आन थोड़ा-थोड़ा करके।
Verse 24 — Surah Al-Insan 76:24
अतः, आप धैर्य से काम लें अपने पालनहार के आदेशानुसार और बात न मानें, उनमें से किसी पापी तथा कृतघ्न की।
Verse 25 — Surah Al-Insan 76:25
तथा स्मरण करें अपने पालनहार के नाम का, प्रातः तथा संध्या (के समय)।
Verse 26 — Surah Al-Insan 76:26
तथा रात्रि में सज्दा करें उसके समक्ष और उसकी पवित्रता का वर्णन करें, रात्रि के लम्बे समय तक।
Verse 27 — Surah Al-Insan 76:27
वास्तव में, ये लोग मोह रखते हैं संसार से और छोड़ रहे हैं अपने पीछे एक भारी दिन[1] को।
Verse 28 — Surah Al-Insan 76:28
हमने ही उन्हें पैदा किया है और सुदृढ़ किये हैं उनके जोड़-बंद तथा जब हम चाहें बदला दें उनके[1] जैसे (दूसरों को)।
Verse 29 — Surah Al-Insan 76:29
निश्चय ये (सूरह) एक शिक्षा है। अतः, जो चाहे अपने पालनहार की ओर (जाने की) राह बना ले।
Verse 30 — Surah Al-Insan 76:30
और तुम अल्लाह की इच्छा के बिना कुछ भी नहीं चाह सकते।[1] वास्तव में, अल्लाह सब चीज़ों और गुणों को जानने वाला है।
Verse 31 — Surah Al-Insan 76:31
वह प्रवेश देता है जिसे चाहे अपनी दया में और अत्याचारियों के लिए उसने तैयार की है दुःखदायी यातना।