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Hindi - Chapter 77 - Al-Mursalat
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Mursalat 77:1
शपथ है भेजी हुई निरन्तर धीमी वायुओं की
Verse 2 — Surah Al-Mursalat 77:2
फिर झक्कड़ वाली हवाओं की
Verse 3 — Surah Al-Mursalat 77:3
और बादलों को फैलाने वालियों की
Verse 4 — Surah Al-Mursalat 77:4
फिर अन्तर करने[1] वालों की
Verse 5 — Surah Al-Mursalat 77:5
फिर पहुँचाने वालों की वह़्यी (प्रकाशना[1]) को
Verse 6 — Surah Al-Mursalat 77:6
क्षमा के लिए अथवा चेतावनी[1] के लिए
Verse 7 — Surah Al-Mursalat 77:7
निश्चय जिसका वचन तुम्हें दिया जा रहा है, वह अवश्य आनी है।
Verse 8 — Surah Al-Mursalat 77:8
फिर जब तारे धुमिल हो जायेंगे।
Verse 9 — Surah Al-Mursalat 77:9
तथा जब आकाश खोल दिया जायेगा।
Verse 10 — Surah Al-Mursalat 77:10
तथा जब पर्वत चूर-चूर करके उड़ा दिये जायेंगे।
Verse 11 — Surah Al-Mursalat 77:11
और जब रसूलों का एक समय निर्धारित किया जायेगा।
Verse 12 — Surah Al-Mursalat 77:12
किस दिन के लिए इसे निलम्बित रखा गया है
Verse 13 — Surah Al-Mursalat 77:13
निर्णय के दिन के लिए।
Verse 14 — Surah Al-Mursalat 77:14
आप क्या जानें कि क्या है वह निर्णय का दिन
Verse 15 — Surah Al-Mursalat 77:15
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 16 — Surah Al-Mursalat 77:16
क्या हमने विनाश नहीं कर दिया (अवज्ञा के कारण) अगली जातियों का
Verse 17 — Surah Al-Mursalat 77:17
फिर पीछे लगा[1] देंगे उनके पिछलों को।
Verse 18 — Surah Al-Mursalat 77:18
इसी प्रकार, हम करते हैं अपराधियों के साथ।
Verse 19 — Surah Al-Mursalat 77:19
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 20 — Surah Al-Mursalat 77:20
क्या हमने पैदा नहीं किया है तुम्हें तुच्छ जल (वीर्य) से
Verse 21 — Surah Al-Mursalat 77:21
फिर हमने रख दिया उसे एक सुदृढ़ स्थान (गर्भाशय) में।
Verse 22 — Surah Al-Mursalat 77:22
एक निश्चित अवधि तक।
Verse 23 — Surah Al-Mursalat 77:23
तो हमने सामर्थ्य[1] रखा, अतः हम अच्छा सामर्थ्य रखने वाले हैं।
Verse 24 — Surah Al-Mursalat 77:24
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 25 — Surah Al-Mursalat 77:25
क्या हमने नहीं बनाया धरती को समेटकर[1] रखने वाली
Verse 26 — Surah Al-Mursalat 77:26
जीवित तथा मुर्दों को।
Verse 27 — Surah Al-Mursalat 77:27
तथा बना दिये हमने उसमें बहुत-से ऊँचे पर्वत और पिलाया हमने तुम्हें मीठा जल।
Verse 28 — Surah Al-Mursalat 77:28
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 29 — Surah Al-Mursalat 77:29
(कहा जायेगाः) चलो उस (नरक) की ओर जिसे तुम झुठलाते रहे।
Verse 30 — Surah Al-Mursalat 77:30
चलो ऐसी छाया[1] की ओर जो तीन शाखाओं वाली है।
Verse 31 — Surah Al-Mursalat 77:31
जो न छाया देगी और न ज्वाला से बचायेगी।
Verse 32 — Surah Al-Mursalat 77:32
वह (अग्नि) फेंकती होगी चिँगारियाँ भवन के समान।
Verse 33 — Surah Al-Mursalat 77:33
जैसे वह पीले ऊँट हों।
Verse 34 — Surah Al-Mursalat 77:34
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 35 — Surah Al-Mursalat 77:35
ये वो दिन है कि वे बोल[1] नहीं सकेंगे।
Verse 36 — Surah Al-Mursalat 77:36
और न उन्हें अनुमति दी जायेगी कि वे बहाने बना सकें।
Verse 37 — Surah Al-Mursalat 77:37
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 38 — Surah Al-Mursalat 77:38
ये निर्णय का दिन है, हमने एकत्र कर लिया है तुम्हें तथा पूर्व के लोगों को।
Verse 39 — Surah Al-Mursalat 77:39
तो यदि तुम्हारे पास कोई चाल[1] हो, तो चल लो।
Verse 40 — Surah Al-Mursalat 77:40
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 41 — Surah Al-Mursalat 77:41
निःसंदेह, आज्ञाकारी उस दिन छाँव तथा जल स्रोतों में होंगे।
Verse 42 — Surah Al-Mursalat 77:42
तथा मन चाहे फलों में।
Verse 43 — Surah Al-Mursalat 77:43
खाओ तथा पिओ मनमानी उन कर्मों के बदले, जो तुम करते रहे।
Verse 44 — Surah Al-Mursalat 77:44
हम इसी प्रकार प्रतिफल देते हैं।
Verse 45 — Surah Al-Mursalat 77:45
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 46 — Surah Al-Mursalat 77:46
(हे झुठलाने वालो!) तुम खा लो तथा आनन्द ले लो कुछ[1] दिन। वास्तव में, तुम अपराधी हो।
Verse 47 — Surah Al-Mursalat 77:47
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 48 — Surah Al-Mursalat 77:48
जब उनसे कहा जाता है कि (अल्लाह के समक्ष) झुको, तो झुकते नहीं।
Verse 49 — Surah Al-Mursalat 77:49
विनाश है उस दिन झुठलाने वालों के लिए।
Verse 50 — Surah Al-Mursalat 77:50
तो (अब) वे किस बात पर इस (क़ुर्आन) के पश्चात् ईमान[1] लायेंगे