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Hindi - Chapter 79 - An-Naziat
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah An-Naziat 79:1
शपथ है उन फ़रिश्तों की जो डूबकर (प्राण) निकालते हैं
Verse 2 — Surah An-Naziat 79:2
और जो सरलता से (प्राण) निकालते हैं।
Verse 3 — Surah An-Naziat 79:3
और जो तैरते रहते हैं।
Verse 4 — Surah An-Naziat 79:4
फिर जो आगे निकल जाते हैं।
Verse 5 — Surah An-Naziat 79:5
फिर जो कार्य की व्यवस्था करते हैं।
Verse 6 — Surah An-Naziat 79:6
जिस दिन धरती काँपेगी।
Verse 7 — Surah An-Naziat 79:7
जिसके पीछे ही दूसरी कम्प आ जायेगी।
Verse 8 — Surah An-Naziat 79:8
उस दिन बहुत-से दिल धड़क रहे होंगे।
Verse 9 — Surah An-Naziat 79:9
उनकी आँखें झुकी होंगी।
Verse 10 — Surah An-Naziat 79:10
वे कहते हैं कि क्या हम फिर पहली स्थिति में लाये जायेंगे
Verse 11 — Surah An-Naziat 79:11
जब हम (भुरभुरी) (खोखली) अस्थियाँ (हड्डियाँ) हो जायेंगे।
Verse 12 — Surah An-Naziat 79:12
उन्होंने कहाः तब तो इस वापसी में क्षति है।
Verse 13 — Surah An-Naziat 79:13
बस वह एक झिड़की होगी।
Verse 14 — Surah An-Naziat 79:14
तब वे अकस्मात धरती के ऊपर होंगे।
Verse 15 — Surah An-Naziat 79:15
(हे नबी!) क्या तुम्हें मूसा का समाचार पहुँचा
Verse 16 — Surah An-Naziat 79:16
जब पवित्र वादी 'तुवा' में उसे उसके पालनहार ने पुकारा।
Verse 17 — Surah An-Naziat 79:17
फ़िरऔन के पास जाओ, वह विद्रोही हो गया है।
Verse 18 — Surah An-Naziat 79:18
तथा उससे कहो कि क्या तुम पवित्र होना चाहोगे
Verse 19 — Surah An-Naziat 79:19
और मैं तुम्हें तुम्हारे पालनहार की सीधी राह दिखाऊँ, तो तुम डरोगे
Verse 20 — Surah An-Naziat 79:20
फिर उसे सबसे बड़ा चिन्ह (चमत्कार) दिखाया।
Verse 21 — Surah An-Naziat 79:21
तो उसने उसे झुठला दिया और बात न मानी।
Verse 22 — Surah An-Naziat 79:22
फिर प्रयास करने लगा।
Verse 23 — Surah An-Naziat 79:23
फिर लोगों को एकत्र किया, फिर पुकारा।
Verse 24 — Surah An-Naziat 79:24
और कहाः मैं तुम्हारा परम पालनहार हूँ।
Verse 25 — Surah An-Naziat 79:25
तो अल्लाह ने उसे संसार तथा परलोक की यातना में घेर लिया।
Verse 26 — Surah An-Naziat 79:26
वास्तव में, इसमें उसके लिए शिक्षा है, जो डरता है।
Verse 27 — Surah An-Naziat 79:27
क्या तुम्हें पैदा करना कठिन है अथवा आकाश को, जिसे उसने बनाया।
Verse 28 — Surah An-Naziat 79:28
उसकी छत ऊँची की और चौरस किया।
Verse 29 — Surah An-Naziat 79:29
और उसकी रात को अंधेरी तथा दिन को उजाला किया।
Verse 30 — Surah An-Naziat 79:30
और इसके बाद धरती को फैलाया।
Verse 31 — Surah An-Naziat 79:31
और उससे पानी और चारा निकाला।
Verse 32 — Surah An-Naziat 79:32
और पर्वतों को गाड़ दिया।
Verse 33 — Surah An-Naziat 79:33
तुम्हारे तथा तुम्हारे पशुओं के लाभ के लिए।
Verse 34 — Surah An-Naziat 79:34
तो जब प्रलय आयेगी।
Verse 35 — Surah An-Naziat 79:35
उस दिन इन्सान अपना करतूत याद करेगा।
Verse 36 — Surah An-Naziat 79:36
और देखने वाले के लिए नरक सामने कर दी जायेगी।
Verse 37 — Surah An-Naziat 79:37
तो जिसने विद्रोह किया।
Verse 38 — Surah An-Naziat 79:38
और सांसारिक जीवन को प्राथमिक्ता दी।
Verse 39 — Surah An-Naziat 79:39
तो नरक ही उसका आवास होगी।
Verse 40 — Surah An-Naziat 79:40
परन्तु, जो अपने पालनहार की महानता से डरा तथा अपने आपको मनमानी करने से रोका।
Verse 41 — Surah An-Naziat 79:41
तो निश्चय ही उसका आवास स्वर्ग है।
Verse 42 — Surah An-Naziat 79:42
वे आपसे प्रश्न करते हैं कि वह समय कब आयेगा
Verse 43 — Surah An-Naziat 79:43
तुम उसकी चर्चा में क्यों पड़े हो
Verse 44 — Surah An-Naziat 79:44
उसके होने के समय का ज्ञान तुम्हारे पालनहार के पास है।
Verse 45 — Surah An-Naziat 79:45
तुम तो उसे सावधान करने के लिए हो, जो उससे डरता है।
Verse 46 — Surah An-Naziat 79:46
वे जिस दिन उसका दर्शन करेंगे, उन्हें ऐसा लगेगा कि वे संसार में एक संध्या या उसके सवेरे से अधिक नहीं ठहरे।