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Hindi - Chapter 90 - Al-Balad
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Balad 90:1
मैं इस नगर मक्का की शपथ लेता हूँ
Verse 2 — Surah Al-Balad 90:2
तथा तुम इस नगर में प्रवेश करने वाले हो।
Verse 3 — Surah Al-Balad 90:3
तथा सौगन्ध है पिता एवं उसकी संतान की
Verse 4 — Surah Al-Balad 90:4
हमने इन्सान को कष्ट में घिरा हुआ पैदा किया है।
Verse 5 — Surah Al-Balad 90:5
क्या वह समझता है कि उसपर किसी का वश नहीं चलेगा
Verse 6 — Surah Al-Balad 90:6
वह कहता है कि मैंने बहुत धन ख़र्च कर दिया।
Verse 7 — Surah Al-Balad 90:7
क्या वह समझता है कि उसे किसी ने देखा नहीं
Verse 8 — Surah Al-Balad 90:8
क्या हमने उसे दो आँखें नहीं दीं
Verse 9 — Surah Al-Balad 90:9
और एक ज़बान तथा दो होंट नहीं दिये
Verse 10 — Surah Al-Balad 90:10
और उसे दोनों मार्ग दिखा दिये।
Verse 11 — Surah Al-Balad 90:11
तो वह घाटी में घुसा ही नहीं।
Verse 12 — Surah Al-Balad 90:12
और तुम क्या जानो कि घाटी क्या है
Verse 13 — Surah Al-Balad 90:13
किसी दास को मुक्त करना।
Verse 14 — Surah Al-Balad 90:14
अथवा भूक के दिन (अकाल) में खाना खिलाना।
Verse 15 — Surah Al-Balad 90:15
किसी अनाथ संबंधी को।
Verse 16 — Surah Al-Balad 90:16
अथवा मिट्टी में पड़े निर्धन को।
Verse 17 — Surah Al-Balad 90:17
फिर वह उन लोगों में होता है जो ईमान लाये और जिन्होंने धैर्य (सहनशीलता) एवं उपकार के उपदेश दिये।
Verse 18 — Surah Al-Balad 90:18
यही लोग सौभाग्यशाली (दायें हाथ वाले) हैं।
Verse 19 — Surah Al-Balad 90:19
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को नहीं माना, यही लोग दुर्भाग्य (बायें हाथ वाले) हैं।
Verse 20 — Surah Al-Balad 90:20
ऐसे लोग, हर ओर से आग में घिरे होंगे।