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Hindi - Chapter 93 - Ad-Duhaa

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Ad-Duhaa 93:1

शपथ है दिन चढ़े की

Verse 2 — Surah Ad-Duhaa 93:2

और शपथ है रात्रि की, जब उसका सन्नाटा छा जाये

Verse 3 — Surah Ad-Duhaa 93:3

(हे नबी!) तेरे पालनहार ने तुझे न तो छोड़ा और ने ही विमुख हुआ।

Verse 4 — Surah Ad-Duhaa 93:4

और निश्चय ही आगामी युग तेरे लिए प्रथम युग से उत्तम है।

Verse 5 — Surah Ad-Duhaa 93:5

और तेरा पालनहार तुझे इतना देगा कि तू प्रसन्न हो जायेगा।

Verse 6 — Surah Ad-Duhaa 93:6

क्या उसने तुझे अनाथ पाकर शरण नहीं दी

Verse 7 — Surah Ad-Duhaa 93:7

और तुझे पथ भूला हुआ पाया, तो सीधा मार्ग नहीं दिखाया

Verse 8 — Surah Ad-Duhaa 93:8

और निर्धन पाया, तो धनी नहीं कर दिया

Verse 9 — Surah Ad-Duhaa 93:9

तो तुम अनाथ पर क्रोध न करना।

Verse 10 — Surah Ad-Duhaa 93:10

और माँगने वाले को न झिड़कना।

Verse 11 — Surah Ad-Duhaa 93:11

और अपने पालनहार के उपकार का वर्णन करना।