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Hindi - Chapter 95 - At-Tin
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah At-Tin 95:1
इंजीर तथा ज़ैतून की शपथ
Verse 2 — Surah At-Tin 95:2
एवं "तूरे सीनीन" की शपथ
Verse 3 — Surah At-Tin 95:3
और इस शान्ति के नगर की शपथ
Verse 4 — Surah At-Tin 95:4
हमने इनसान को मनोहर रूप में पैदा किया है।
Verse 5 — Surah At-Tin 95:5
फिर उसे सबसे नीचे गिरा दिया।
Verse 6 — Surah At-Tin 95:6
परन्तु, जो ईमान लाये तथा सदाचार किये, उनके लिए ऐसा बदला है, जो कभी समाप्त नहीं होगा।
Verse 7 — Surah At-Tin 95:7
फिर (तुम मानव जाति) प्रतिफल (बदले) के दिन को क्यों झुठलाते हो
Verse 8 — Surah At-Tin 95:8
क्या अल्लाह सब अधिकारियों से बढ़ कर अधिकारी नहीं है