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Hindi - Chapter 79 - An-Naziat

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah An-Naziat 79:1

गवाह है वे (हवाएँ) जो ज़ोर से उखाड़ फैंके

Verse 2 — Surah An-Naziat 79:2

और गवाह है वे (हवाएँ) जो नर्मी के साथ चलें

Verse 3 — Surah An-Naziat 79:3

और गवाह है वे जो वायुमंडल में तैरें

Verse 4 — Surah An-Naziat 79:4

फिर एक-दूसरे से अग्रसर हों

Verse 5 — Surah An-Naziat 79:5

और मामले की तदबीर करें

Verse 6 — Surah An-Naziat 79:6

जिस दिन हिला डालेगी हिला डालनेवाले घटना

Verse 7 — Surah An-Naziat 79:7

उसके पीछ घटित होगी दूसरी (घटना)

Verse 8 — Surah An-Naziat 79:8

कितने ही दिल उस दिन काँप रहे होंगे

Verse 9 — Surah An-Naziat 79:9

उनकी निगाहें झुकी होंगी

Verse 10 — Surah An-Naziat 79:10

वे कहते है, "क्या वास्तव में हम पहली हालत में फिर लौटाए जाएँगे

Verse 11 — Surah An-Naziat 79:11

क्या जब हम खोखली गलित हड्डियाँ हो चुके होंगे

Verse 12 — Surah An-Naziat 79:12

वे कहते है, "तब तो लौटना बड़े ही घाटे का होगा।

Verse 13 — Surah An-Naziat 79:13

वह तो बस एक ही झिड़की होगी

Verse 14 — Surah An-Naziat 79:14

फिर क्या देखेंगे कि वे एक समतल मैदान में उपस्थित है

Verse 15 — Surah An-Naziat 79:15

क्या तुम्हें मूसा की ख़बर पहुँची है

Verse 16 — Surah An-Naziat 79:16

जबकि उसके रब ने पवित्र घाटी 'तुवा' में उसे पुकारा था

Verse 17 — Surah An-Naziat 79:17

कि "फ़िरऔन के पास जाओ, उसने बहुत सिर उठा रखा है

Verse 18 — Surah An-Naziat 79:18

और कहो, क्या तू यह चाहता है कि स्वयं को पाक-साफ़ कर ले

Verse 19 — Surah An-Naziat 79:19

और मैं तेरे रब की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ कि तु (उससे) डरे

Verse 20 — Surah An-Naziat 79:20

फिर उसने (मूसा ने) उसको बड़ी निशानी दिखाई

Verse 21 — Surah An-Naziat 79:21

किन्तु उसने झुठला दिया और कहा न माना

Verse 22 — Surah An-Naziat 79:22

फिर सक्रियता दिखाते हुए पलटा

Verse 23 — Surah An-Naziat 79:23

फिर (लोगों को) एकत्र किया और पुकारकर कहा

Verse 24 — Surah An-Naziat 79:24

मैं तुम्हारा उच्चकोटि का स्वामी हूँ

Verse 25 — Surah An-Naziat 79:25

अन्ततः अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की शिक्षाप्रद यातना में पकड़ लिया

Verse 26 — Surah An-Naziat 79:26

निस्संदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए बड़ी शिक्षा है जो डरे

Verse 27 — Surah An-Naziat 79:27

क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन कार्य है या आकाश को? अल्लाह ने उसे बनाया

Verse 28 — Surah An-Naziat 79:28

उसकी ऊँचाई को ख़ूब ऊँचा करके उसे ठीक-ठाक किया

Verse 29 — Surah An-Naziat 79:29

और उसकी रात को अन्धकारमय बनाया और उसका दिवस-प्रकाश प्रकट किया

Verse 30 — Surah An-Naziat 79:30

और धरती को देखो! इसके पश्चात उसे फैलाया

Verse 31 — Surah An-Naziat 79:31

उसमें से उसका पानी और उसका चारा निकाला

Verse 32 — Surah An-Naziat 79:32

और पहाड़ो को देखो! उन्हें उस (धरती) में जमा दिया

Verse 33 — Surah An-Naziat 79:33

तुम्हारे लिए और तुम्हारे मवेशियों के लिए जीवन-सामग्री के रूप में

Verse 34 — Surah An-Naziat 79:34

फिर जब वह महाविपदा आएगी

Verse 35 — Surah An-Naziat 79:35

उस दिन मनुष्य जो कुछ भी उसने प्रयास किया होगा उसे याद करेगा

Verse 36 — Surah An-Naziat 79:36

और भड़कती आग (जहन्नम) देखने वालों के लिए खोल दी जाएगी

Verse 37 — Surah An-Naziat 79:37

तो जिस किसी ने सरकशी की

Verse 38 — Surah An-Naziat 79:38

और सांसारिक जीवन को प्राथमिकता दो होगी

Verse 39 — Surah An-Naziat 79:39

तो निस्संदेह भड़कती आग ही उसका ठिकाना है

Verse 40 — Surah An-Naziat 79:40

और रहा वह व्यक्ति जिसने अपने रब के सामने खड़े होने का भय रखा और अपने जी को बुरी इच्छा से रोका

Verse 41 — Surah An-Naziat 79:41

तो जन्नत ही उसका ठिकाना है

Verse 42 — Surah An-Naziat 79:42

वे तुमसे उस घड़ी के विषय में पूछते है कि वह कब आकर ठहरेगी

Verse 43 — Surah An-Naziat 79:43

उसके बयान करने से तुम्हारा क्या सम्बन्ध

Verse 44 — Surah An-Naziat 79:44

उसकी अन्तिम पहुँच तो तेरे से ही सम्बन्ध रखती है

Verse 45 — Surah An-Naziat 79:45

तुम तो बस उस व्यक्ति को सावधान करनेवाले हो जो उससे डरे

Verse 46 — Surah An-Naziat 79:46

जिस दिन वे उसे देखेंगे तो (ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) बस एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे है