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Hindi - Chapter 78 - An-Naba

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah An-Naba 78:1

किस चीज़ के विषय में वे आपस में पूछ-गच्छ कर रहे है

Verse 2 — Surah An-Naba 78:2

उस बड़ी ख़बर के सम्बन्ध में

Verse 3 — Surah An-Naba 78:3

जिसमें वे मतभेद रखते है

Verse 4 — Surah An-Naba 78:4

कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।

Verse 5 — Surah An-Naba 78:5

फिर कदापि नहीं, शीघ्र ही वे जान लेंगे।

Verse 6 — Surah An-Naba 78:6

क्या ऐसा नहीं है कि हमने धरती को बिछौना बनाया

Verse 7 — Surah An-Naba 78:7

और पहाड़ों को मेख़े

Verse 8 — Surah An-Naba 78:8

और हमने तुम्हें जोड़-जोड़े पैदा किया

Verse 9 — Surah An-Naba 78:9

और तुम्हारी नींद को थकन दूर करनेवाली बनाया

Verse 10 — Surah An-Naba 78:10

रात को आवरण बनाया

Verse 11 — Surah An-Naba 78:11

और दिन को जीवन-वृति के लिए बनाया

Verse 12 — Surah An-Naba 78:12

और तुम्हारे ऊपर सात सुदृढ़ आकाश निर्मित किए

Verse 13 — Surah An-Naba 78:13

और एक तप्त और प्रकाशमान प्रदीप बनाया

Verse 14 — Surah An-Naba 78:14

और बरस पड़नेवाली घटाओं से हमने मूसलाधार पानी उतारा

Verse 15 — Surah An-Naba 78:15

ताकि हम उसके द्वारा अनाज और वनस्पति उत्पादित करें

Verse 16 — Surah An-Naba 78:16

और सघन बांग़ भी।

Verse 17 — Surah An-Naba 78:17

निस्संदेह फ़ैसले का दिन एक नियत समय है

Verse 18 — Surah An-Naba 78:18

जिस दिन नरसिंघा में फूँक मारी जाएगी, तो तुम गिरोह को गिरोह चले आओगे।

Verse 19 — Surah An-Naba 78:19

और आकाश खोल दिया जाएगा तो द्वार ही द्वार हो जाएँगे

Verse 20 — Surah An-Naba 78:20

और पहाड़ चलाए जाएँगे, तो वे बिल्कुल मरीचिका होकर रह जाएँगे

Verse 21 — Surah An-Naba 78:21

वास्तव में जहन्नम एक घात-स्थल है

Verse 22 — Surah An-Naba 78:22

सरकशों का ठिकाना है

Verse 23 — Surah An-Naba 78:23

वस्तुस्थिति यह है कि वे उसमें मुद्दत पर मुद्दत बिताते रहेंगे

Verse 24 — Surah An-Naba 78:24

वे उसमे न किसी शीतलता का मज़ा चखेगे और न किसी पेय का

Verse 25 — Surah An-Naba 78:25

सिवाय खौलते पानी और बहती पीप-रक्त के

Verse 26 — Surah An-Naba 78:26

यह बदले के रूप में उनके कर्मों के ठीक अनुकूल होगा

Verse 27 — Surah An-Naba 78:27

वास्तव में किसी हिसाब की आशा न रखते थे

Verse 28 — Surah An-Naba 78:28

और उन्होंने हमारी आयतों को ख़ूब झुठलाया

Verse 29 — Surah An-Naba 78:29

और हमने हर चीज़ लिखकर गिन रखी है

Verse 30 — Surah An-Naba 78:30

अब चखो मज़ा कि यातना के अतिरिक्त हम तुम्हारे लिए किसी और चीज़ में बढ़ोत्तरी नहीं करेंगे।

Verse 31 — Surah An-Naba 78:31

निस्सदेह डर रखनेवालों के लिए एक बड़ी सफलता है

Verse 32 — Surah An-Naba 78:32

बाग़ है और अंगूर

Verse 33 — Surah An-Naba 78:33

और नवयौवना समान उम्रवाली

Verse 34 — Surah An-Naba 78:34

और छलक़ता जाम

Verse 35 — Surah An-Naba 78:35

वे उसमें न तो कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न कोई झुठलाने की बात

Verse 36 — Surah An-Naba 78:36

यह तुम्हारे रब की ओर से बदला होगा, हिसाब के अनुसार प्रदत्त

Verse 37 — Surah An-Naba 78:37

वह आकाशों और धरती का और जो कुछ उनके बीच है सबका रब है, अत्यन्त कृपाशील है, उसके सामने बात करना उनके बस में नहीं होगा

Verse 38 — Surah An-Naba 78:38

जिस दिन रूह और फ़रिश्ते पक्तिबद्ध खड़े होंगे, वे बोलेंगे नहीं, सिवाय उस व्यक्ति के जिसे रहमान अनुमति दे और जो ठीक बात कहे

Verse 39 — Surah An-Naba 78:39

वह दिन सत्य है। अब जो कोई चाहे अपने रब की ओर रुज करे

Verse 40 — Surah An-Naba 78:40

हमने तुम्हें निकट आ लगी यातना से सावधान कर दिया है। जिस दिन मनुष्य देख लेगा जो कुछ उसके हाथों ने आगे भेजा, और इनकार करनेवाला कहेगा, "ऐ काश! कि मैं मिट्टी होता