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Hindi - Chapter 84 - Al-Inshiqaq

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Inshiqaq 84:1

जबकि आकाश फट जाएगा

Verse 2 — Surah Al-Inshiqaq 84:2

और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी

Verse 3 — Surah Al-Inshiqaq 84:3

जब धरती फैला दी जाएगी

Verse 4 — Surah Al-Inshiqaq 84:4

और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी

Verse 5 — Surah Al-Inshiqaq 84:5

और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी

Verse 6 — Surah Al-Inshiqaq 84:6

ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है

Verse 7 — Surah Al-Inshiqaq 84:7

फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया

Verse 8 — Surah Al-Inshiqaq 84:8

तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा

Verse 9 — Surah Al-Inshiqaq 84:9

और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा

Verse 10 — Surah Al-Inshiqaq 84:10

और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया

Verse 11 — Surah Al-Inshiqaq 84:11

तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा

Verse 12 — Surah Al-Inshiqaq 84:12

और दहकती आग में जा पड़ेगा

Verse 13 — Surah Al-Inshiqaq 84:13

वह अपने लोगों में मग्न था

Verse 14 — Surah Al-Inshiqaq 84:14

उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है

Verse 15 — Surah Al-Inshiqaq 84:15

क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था

Verse 16 — Surah Al-Inshiqaq 84:16

अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की

Verse 17 — Surah Al-Inshiqaq 84:17

और रात की और उसके समेट लेने की

Verse 18 — Surah Al-Inshiqaq 84:18

और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है

Verse 19 — Surah Al-Inshiqaq 84:19

निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है

Verse 20 — Surah Al-Inshiqaq 84:20

फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते

Verse 21 — Surah Al-Inshiqaq 84:21

और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते

Verse 22 — Surah Al-Inshiqaq 84:22

नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है

Verse 23 — Surah Al-Inshiqaq 84:23

हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है

Verse 24 — Surah Al-Inshiqaq 84:24

अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो

Verse 25 — Surah Al-Inshiqaq 84:25

अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है