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Hindi - Chapter 91 - Ash-Shams
Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink
Verse 1 — Surah Ash-Shams 91:1
साक्षी है सूर्य और उसकी प्रभा
Verse 2 — Surah Ash-Shams 91:2
और चन्द्रमा जबकि वह उनके पीछे आए
Verse 3 — Surah Ash-Shams 91:3
और दिन, जबकि वह उसे प्रकट कर दे
Verse 4 — Surah Ash-Shams 91:4
और रात, जबकि वह उसको ढाँक ले
Verse 5 — Surah Ash-Shams 91:5
और आकाश और जैसा कुछ उसे उठाया
Verse 6 — Surah Ash-Shams 91:6
और धरती और जैसा कुछ उसे बिछाया
Verse 7 — Surah Ash-Shams 91:7
और आत्मा और जैसा कुछ उसे सँवारा
Verse 8 — Surah Ash-Shams 91:8
फिर उसके दिल में डाली उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी
Verse 9 — Surah Ash-Shams 91:9
सफल हो गया जिसने उसे विकसित किया
Verse 10 — Surah Ash-Shams 91:10
और असफल हुआ जिसने उसे दबा दिया
Verse 11 — Surah Ash-Shams 91:11
समूद ने अपनी सरकशी से झुठलाया
Verse 12 — Surah Ash-Shams 91:12
जब उनमें का सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली उठ खड़ा हुआ
Verse 13 — Surah Ash-Shams 91:13
तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा, "सावधान, अल्लाह की ऊँटनी और उसके पिलाने (की बारी) से।
Verse 14 — Surah Ash-Shams 91:14
किन्तु उन्होंने उसे झुठलाया और उस ऊँटनी की कूचें काट डाली। अन्ततः उनके रब ने उनके गुनाह के कारण उनपर तबाही डाल दी और उन्हें बराबर कर दिया
Verse 15 — Surah Ash-Shams 91:15
और उसे उसके परिणाम का कोई भय नहीं