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Hindi - Chapter 96 - Al-Alaq

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Alaq 96:1

पढ़ो, अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया

Verse 2 — Surah Al-Alaq 96:2

पैदा किया मनुष्य को जमे हुए ख़ून के एक लोथड़े से

Verse 3 — Surah Al-Alaq 96:3

पढ़ो, हाल यह है कि तुम्हारा रब बड़ा ही उदार है

Verse 4 — Surah Al-Alaq 96:4

जिसने क़लम के द्वारा शिक्षा दी

Verse 5 — Surah Al-Alaq 96:5

मनुष्य को वह ज्ञान प्रदान किया जिस वह न जानता था

Verse 6 — Surah Al-Alaq 96:6

कदापि नहीं, मनुष्य सरकशी करता है

Verse 7 — Surah Al-Alaq 96:7

इसलिए कि वह अपने आपको आत्मनिर्भर देखता है

Verse 8 — Surah Al-Alaq 96:8

निश्चय ही तुम्हारे रब ही की ओर पलटना है

Verse 9 — Surah Al-Alaq 96:9

क्या तुमने देखा उस व्यक्ति को

Verse 10 — Surah Al-Alaq 96:10

जो एक बन्दे को रोकता है, जब वह नमाज़ अदा करता है

Verse 11 — Surah Al-Alaq 96:11

तुम्हारा क्या विचार है? यदि वह सीधे मार्ग पर हो

Verse 12 — Surah Al-Alaq 96:12

या परहेज़गारी का हुक्म दे (उसके अच्छा होने में क्या संदेह है)

Verse 13 — Surah Al-Alaq 96:13

तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है)

Verse 14 — Surah Al-Alaq 96:14

क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है

Verse 15 — Surah Al-Alaq 96:15

कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे

Verse 16 — Surah Al-Alaq 96:16

झूठी, ख़ताकार चोटी

Verse 17 — Surah Al-Alaq 96:17

अब बुला ले वह अपनी मजलिस को

Verse 18 — Surah Al-Alaq 96:18

हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को

Verse 19 — Surah Al-Alaq 96:19

कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो