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Hindi - Chapter 53 - An-Najm
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah An-Najm 53:1
शपथ है तारे की, जब वह डूबने लगे
Verse 2 — Surah An-Najm 53:2
नहीं कुपथ हुआ है तुम्हारा साथी और न कुमार्ग हुआ है।
Verse 3 — Surah An-Najm 53:3
और वह नहीं बोलते अपनी इच्छा से।
Verse 4 — Surah An-Najm 53:4
वह तो बस वह़्यी (प्रकाशना) है। जो (उनकी ओर) की जाती है।
Verse 5 — Surah An-Najm 53:5
सिखाया है जिसे उन्हें शक्तिवान ने।
Verse 6 — Surah An-Najm 53:6
बड़े बलशाली ने, फिर वह सीधा खड़ा हो गया।
Verse 7 — Surah An-Najm 53:7
तथा वह आकाश के ऊपरी किनारे पर था।
Verse 8 — Surah An-Najm 53:8
फिर समीप हुआ और फिर लटक गया।
Verse 9 — Surah An-Najm 53:9
फिर हो गया दो कमान के बराबर अथवा उससे भी समीप।
Verse 10 — Surah An-Najm 53:10
फिर उसने वह़्यी की उस (अल्लाह) के भक्त[1] की ओर, जो भी वह़्यी की।
Verse 11 — Surah An-Najm 53:11
नहीं झुठलाया उनके दिल ने, जो कुछ उन्होंने देखा।
Verse 12 — Surah An-Najm 53:12
तो क्या तुम उनसे झगड़ते हो उसपर, जिसे वे (आँखों से) देखते हैं
Verse 13 — Surah An-Najm 53:13
निःसंदेह, उन्होंने उसे एक बार और भी उतरते देखा।
Verse 14 — Surah An-Najm 53:14
सिद्-रतुल मुन्हा[1] के पास।
Verse 15 — Surah An-Najm 53:15
जिसके पास जन्नतुल[1] मावा है।
Verse 16 — Surah An-Najm 53:16
जब सिद्-रह पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।
Verse 17 — Surah An-Najm 53:17
न तो निगाह चुंधियाई और न सीमा से आगे हुई।
Verse 18 — Surah An-Najm 53:18
निश्चय आपने अपने पालनहार की बड़ी निशानियाँ देखीं।
Verse 19 — Surah An-Najm 53:19
तो (हे मुश्रिको!) क्या तुमने देख लिया लात्त तथा उज़्ज़ा को।
Verse 20 — Surah An-Najm 53:20
तथा एक तीसरे मनात को
Verse 21 — Surah An-Najm 53:21
क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस अल्लाह के लिए पुत्रियाँ
Verse 22 — Surah An-Najm 53:22
ये तो बड़ा भोंडा विभाजन है।
Verse 23 — Surah An-Najm 53:23
वास्तव में, ये कुछ केवल नाम हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे पूर्वजों ने रख लिये हैं। नहीं उतारा है अल्लाह ने उनका कोई प्रमाण। वे केवल अनुमान[1] पर चल रहे हैं तथा अपनी मनमानी पर। जबकि आ चुका है उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन।
Verse 24 — Surah An-Najm 53:24
क्या मनुष्य को वही मिल जायेगा, जिसकी वह कामना करे
Verse 25 — Surah An-Najm 53:25
(नहीं, ये बात नहीं है) क्योंकि अल्लाह के अधिकार में है आख़िरत (परलोक) तथा संसार।
Verse 26 — Surah An-Najm 53:26
और आकाशों में बहुत-से फ़रिश्ते हैं, जिनकी अनुशंसा कुछ लाभ नहीं देती, परन्तु इसके पश्चात् कि अनुमति दे अल्लाह जिसके लिए चाहे तथा उससे प्रसन्न हो।
Verse 27 — Surah An-Najm 53:27
वास्तव में, जो ईमान नहीं लाते परलोक पर, वे नाम देते हैं फ़रिश्तों के, स्त्रियों के नाम।
Verse 28 — Surah An-Najm 53:28
उन्हें इसका कोई ज्ञान नहीं। वे अनुसरण कर रहे हैं मात्र गुमान का और वस्तुतः गुमान नहीं लाभप्रद होता सत्य के सामने कुछ भी।
Verse 29 — Surah An-Najm 53:29
अतः, आप विमुख हो जायें उससे, जिसने मुँह फेर लिया है हमारी शिक्षा से तथा वह सांसारिक जीवन ही चाहता है।
Verse 30 — Surah An-Najm 53:30
यही उनके ज्ञान की पहुँच है। वास्तव में, आपका पालनहार ही अधिक जानता है उसे, जो कुपथ हो गया उसके मार्ग से तथा उसे, जिसने संमार्ग अपना लिया।
Verse 31 — Surah An-Najm 53:31
तथा अल्लाह ही का है जो आकाशों तथा धरती में है, ताकि वह बदला दे उसे, जिसने बुराई की उसके कुकर्म का और बदला दे उसे, जिसने सुकर्म किया अच्छा बदला।
Verse 32 — Surah An-Najm 53:32
उन लोगों को जो बचते हैं महा पापों तथा निर्लज्जा[1] से, कुछ चूक के सिवा। वास्तव में, आपका पालनहार उदार, क्षमाशील है। वह भली-भाँति जानता है तुम्हें, जबकि उसने पैदा किया तुम्हें धरती[2] से तथा जब तुम भ्रुण थे अपनी माताओं के गर्भ में। अतः, अपने में पवित्र न बनो। वही भली-भाँति जानता है उसे, जिसने सदाचार किया है।
Verse 33 — Surah An-Najm 53:33
तो क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया
Verse 34 — Surah An-Najm 53:34
और तनिक दान किया फिर रुक गया।
Verse 35 — Surah An-Najm 53:35
क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है कि वह (सब कुछ) देख[1] रहा है
Verse 36 — Surah An-Najm 53:36
क्या उसे सूचना नहीं हुई उन बातों की, जो मूसा के ग्रन्थों में हैं
Verse 37 — Surah An-Najm 53:37
और इब्राहीम की, जिसने (अपना वचन) पूरा कर दिया।
Verse 38 — Surah An-Najm 53:38
कि कोई दूसरे का भार नहीं लादेगा।
Verse 39 — Surah An-Najm 53:39
और ये कि मनुष्य के लिए वही है, जो उसने प्रयास किया।
Verse 40 — Surah An-Najm 53:40
और ये कि उसका प्रयास शीघ्र देखा जायेगा।
Verse 41 — Surah An-Najm 53:41
फिर प्रतिफल दिया जायेगा उसे पूरा प्रतिफल।
Verse 42 — Surah An-Najm 53:42
और ये कि आपके पालनहार की ओर ही (सबको) पहुँचना है।
Verse 43 — Surah An-Najm 53:43
तथा वही है, जिसने (संसार में) हँसाया तथा रुलाया।
Verse 44 — Surah An-Najm 53:44
तथा उसीने मारा और जिवाया।
Verse 45 — Surah An-Najm 53:45
तथा उसीने दोनों प्रकार उत्पन्न किये; नर और नारी।
Verse 46 — Surah An-Najm 53:46
वीर्य से, जब (गर्भाशय में) गिरा।
Verse 47 — Surah An-Najm 53:47
तथा उसी के ऊपर दूसरी बार[1] उत्पन्न करना है।
Verse 48 — Surah An-Najm 53:48
तथा उसीने धनी बनाया और धन दिया।
Verse 49 — Surah An-Najm 53:49
और वही शेअरा[1] का स्वामी है।
Verse 50 — Surah An-Najm 53:50
तथा उसीने ध्वस्त किया प्रथम[1] आद को।
Verse 51 — Surah An-Najm 53:51
तथा समूद[1] को। किसी को शेष नहीं रखा।
Verse 52 — Surah An-Najm 53:52
तथा नूह़ की जाति को इससे पहले, वस्तुतः, वे बड़े अत्याचारी, अवज्ञाकारी थे।
Verse 53 — Surah An-Najm 53:53
तथा औंधी की हुई बस्ती[1] को उसने गिरा दिया।
Verse 54 — Surah An-Najm 53:54
फिर उसपर छा दिया, जो छा[1] दिया।
Verse 55 — Surah An-Najm 53:55
तो (हे मनुष्य!) तू अपने पालनहार के किन किन पुरस्कारों में संदेह करता रहेगा
Verse 56 — Surah An-Najm 53:56
ये[1] सचेतकर्ता है, प्रथम सचेतकर्ताओं में से।
Verse 57 — Surah An-Najm 53:57
समीप आ लगी समीप आने वाली।
Verse 58 — Surah An-Najm 53:58
नहीं है अल्लाह के सिवा उसे कोई दूर करने वाला।
Verse 59 — Surah An-Najm 53:59
तो क्या तुम इस[1] क़ुर्आन पर आश्चर्य करते हो
Verse 60 — Surah An-Najm 53:60
तथा हँसते हो और रोते नहीं।
Verse 61 — Surah An-Najm 53:61
तथा विमुख हो रहे हो।
Verse 62 — Surah An-Najm 53:62
अतः, सज्दा करो अल्लाह के लिए तथा उसी की वंदना[1] करो।