Back to Languages

Hindi - Chapter 54 - Al-Qamar

Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Qamar 54:1

समीप आ गयी[1] प्रलय तथा दो खण्ड हो गया चाँद।

Verse 2 — Surah Al-Qamar 54:2

और यदि वे देखते हैं कोई निशानी, तो मुँह फेर लेते हैं और कहते हैं: ये तो जादू है, जो होता रहा है।

Verse 3 — Surah Al-Qamar 54:3

और उन्होंने झुठलाया और अनुसरण किया अपनी आकांक्षाओं का और प्रत्येक कार्य का एक निश्चित समय है।

Verse 4 — Surah Al-Qamar 54:4

और निश्चय आ चुके हैं उनके पास कुछ ऐसे समाचार, जिनमें चेतावनी है।

Verse 5 — Surah Al-Qamar 54:5

ये (क़ुर्आन) पूर्णतः तत्वदर्शिता (ज्ञान) है, फिर भी नहीं काम आयी उनके, चेतावनियाँ।

Verse 6 — Surah Al-Qamar 54:6

तो आप विमुख हो जायें उनसे, जिस दिन पुकारने वाला पुकारेगा एक अप्रिय चीज़ की[1] ओर।

Verse 7 — Surah Al-Qamar 54:7

झुकी होंगी उनकी आँखें। वे निकल रहे होंगे समाधियों से, जैसे कि वे टिड्डी दल हों बिखरे हुए।

Verse 8 — Surah Al-Qamar 54:8

तो उसने प्रार्थना की अपने पालनहार से कि मैं विवश हूँ, अतः, मेरा बदला ले ले।

Verse 9 — Surah Al-Qamar 54:9

झुठलाया इनसे पहले नूह़ की जाति ने। तो झुठलाया उन्होंने हमारे भक्त को और कहा कि पागल है और (उसे) झड़का गया।

Verse 10 — Surah Al-Qamar 54:10

तो उसने प्रार्थना की अपने पालनहार से कि मैं विवश हूँ, अतः मेरा बदला ले ले।

Verse 11 — Surah Al-Qamar 54:11

तो हमने खोल दिये आकाश के द्वार धारा प्रवाह जल के साथ।

Verse 12 — Surah Al-Qamar 54:12

तथा फाड़ दिये धरती के स्रोत, तो मिल गया (आकाश और धरती का) जल उस कार्य के अनुसार जो निश्चित किया गया।

Verse 13 — Surah Al-Qamar 54:13

और सवार कर दिया हमने उसे (नूह़ को) तख़्तों तथा कीलों वाली (नाव) पर।

Verse 14 — Surah Al-Qamar 54:14

जो चल रही थी हमारी रक्षा में, उसका बदला लेने के लिए, जिसके साथ कुफ़्र किया गया था।

Verse 15 — Surah Al-Qamar 54:15

और हमने छोड़ दिया इसे एक शिक्षा बनाकर। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला

Verse 16 — Surah Al-Qamar 54:16

फिर (देख लो!) कैसी रही मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ

Verse 17 — Surah Al-Qamar 54:17

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला

Verse 18 — Surah Al-Qamar 54:18

झुठलाया आद ने, तो कैसी रही मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ

Verse 19 — Surah Al-Qamar 54:19

हमने भेज दी उनपर कड़ी आँधी, एक निरन्तर अशुभ दिन में।

Verse 20 — Surah Al-Qamar 54:20

जो उखाड़ रही थी लोगों को, जैसे वे खजूर के खोखले तने हों।

Verse 21 — Surah Al-Qamar 54:21

तो कैसी रही मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ

Verse 22 — Surah Al-Qamar 54:22

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला

Verse 23 — Surah Al-Qamar 54:23

झुठला दिया समूद[1] ने चेतावनियों को।

Verse 24 — Surah Al-Qamar 54:24

और कहाः क्या अपने ही में से एक मनुष्य का हम अनुसरण करें? वास्तव में, तब तो हम निश्चय बड़े कुपथ तथा पागलपन में हैं।

Verse 25 — Surah Al-Qamar 54:25

क्या उतारी गयी है शिक्षा उसीपर हमारे बीच में से? (नहीं) बल्कि वह बड़ा झूठा अहंकारी है।

Verse 26 — Surah Al-Qamar 54:26

उन्हें कल ही ज्ञान हो जायेगा कि कौन बड़ा झूठा अहंकारी है

Verse 27 — Surah Al-Qamar 54:27

वास्तव में, हम भेजने वाले हैं ऊँटनी उनकी परीक्षा के लिए। अतः, (हे सालेह!) तुम उनके (परिणाम की) प्रतीक्षा करो तथा धैर्य रखो।

Verse 28 — Surah Al-Qamar 54:28

और उन्हें सूचित कर दो कि जल विभाजित होगा उनके बीच और प्रत्येक अपनी बारी के दिन[1] उपस्थित होगा।

Verse 29 — Surah Al-Qamar 54:29

तो उन्होंने पुकारा अपने साथी को। तो उसने आक्रमण किया और उसे वध कर दिया।

Verse 30 — Surah Al-Qamar 54:30

फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरी चेतावनियाँ

Verse 31 — Surah Al-Qamar 54:31

हमने भेज दी उनपर कर्कश ध्वनि, तो वे हो गये बाड़ा बनाने वाले की रौंदी हुई बाढ़ के समान (चूर-चूर)।

Verse 32 — Surah Al-Qamar 54:32

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला

Verse 33 — Surah Al-Qamar 54:33

झुठला दिया लूत की जाति ने चेतावनियों को।

Verse 34 — Surah Al-Qamar 54:34

तो हमने भेज दिये उनपर पत्थर लूत के परिजनों के सिवा, हमने उन्हें बचा लिया रात्रि के पिछले पहर।

Verse 35 — Surah Al-Qamar 54:35

अपने विशेष अनुग्रह से। इसी प्रकार हम बदला देते हैं उसको जो कृतज्ञ हो।

Verse 36 — Surah Al-Qamar 54:36

और निःसंदेह, लूत ने सावधान किया उनको हमारी पकड़ से। परन्तु, उन्होंने संदेह किया चेतावनियों के विषय में।

Verse 37 — Surah Al-Qamar 54:37

और बहलाना चाहा उस (लूत) को उसके अतिथियों[1] से तो हमने अंधी कर दी उनकी आँखें कि चखो मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियों (का परिणाम)।

Verse 38 — Surah Al-Qamar 54:38

और उनपर आ पहुँची प्रातः भोर ही में स्थायी यातना।

Verse 39 — Surah Al-Qamar 54:39

तो चखो मेरी यातना तथा मेरी चेतावनियाँ।

Verse 40 — Surah Al-Qamar 54:40

और हमने सरल कर दिया है क़ुर्आन को शिक्षा के लिए। तो क्या, है कोई शिक्षा ग्रहण करने वाला

Verse 41 — Surah Al-Qamar 54:41

तथा फ़िरऔनियों के पास भी चेतावनियाँ आयीं।

Verse 42 — Surah Al-Qamar 54:42

उन्होंने झुठलाया हमारी प्रत्येक निशानी को तो हमने पकड़ लिया उन्हें अति प्रभावी आधिपति के पकड़ने के समान।

Verse 43 — Surah Al-Qamar 54:43

(हे मक्का वासियों!) क्या तुम्हारे काफ़िर उत्तम हैं उनसे अथवा तुम्हारी मुक्ति लिखी हुई है आकाशीय पुस्तकों में

Verse 44 — Surah Al-Qamar 54:44

अथवा वे कहते हैं कि हम विजेता समूह हैं।

Verse 45 — Surah Al-Qamar 54:45

शीध्र ही प्राजित कर दिया जायेगा ये समूह और वे पीठ दिखा[1] देंगे।

Verse 46 — Surah Al-Qamar 54:46

बल्कि प्रलय उनके वचन का समय है तथा प्रलय अधिक कड़ी और तीखी है।

Verse 47 — Surah Al-Qamar 54:47

वस्तुतः, ये पापी, कुपथ तथा अग्नि में हैं।

Verse 48 — Surah Al-Qamar 54:48

जिस दिन वे घसीटे जायेंगे यातना में अपने मुखों के बल (उनसे कहा जायेगा कि) चखो नरक की यातना का स्वाद।

Verse 49 — Surah Al-Qamar 54:49

निश्चय हमने प्रत्येक वस्तु को उत्पन्न किया है एक अनुमान से।

Verse 50 — Surah Al-Qamar 54:50

और हमारा आदेश बस एक ही बार होता है आँख झपकने के समान।

Verse 51 — Surah Al-Qamar 54:51

और हम ध्वस्त कर चुके हैं तुम्हारे जैसे बहुत-से समुदायों को।

Verse 52 — Surah Al-Qamar 54:52

जो कुछ उन्होंने किया है कर्मपत्र में है।

Verse 53 — Surah Al-Qamar 54:53

और प्रत्येक तुच्छ तथा बड़ी बात अंकित है।

Verse 54 — Surah Al-Qamar 54:54

वस्तुतः, सदाचारी लोग स्वर्गों तथा नहरों में होंगे।

Verse 55 — Surah Al-Qamar 54:55

सत्य के स्थान में, अति सामर्थ्यवान स्वामी के पास।