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Hindi - Chapter 82 - Al-Infitar

Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink

Verse 1 — Surah Al-Infitar 82:1

जबकि आकाश फट जाएगा

Verse 2 — Surah Al-Infitar 82:2

और जबकि तारे बिखर जाएँगे

Verse 3 — Surah Al-Infitar 82:3

और जबकि समुद्र बह पड़ेंगे

Verse 4 — Surah Al-Infitar 82:4

और जबकि क़बें उखेड़ दी जाएँगी

Verse 5 — Surah Al-Infitar 82:5

तब हर व्यक्ति जान लेगा जिसे उसने प्राथमिकता दी और पीछे डाला

Verse 6 — Surah Al-Infitar 82:6

ऐ मनुष्य! किस चीज़ ने तुझे अपने उदार प्रभु के विषय में धोखे में डाल रखा हैं

Verse 7 — Surah Al-Infitar 82:7

जिसने तेरा प्रारूप बनाया, फिर नख-शिख से तुझे दुरुस्त किया और तुझे संतुलन प्रदान किया

Verse 8 — Surah Al-Infitar 82:8

जिस रूप में चाहा उसने तुझे जोड़कर तैयार किया

Verse 9 — Surah Al-Infitar 82:9

कुछ नहीं, बल्कि तुम बदला दिए जाने का झुठलाते हो

Verse 10 — Surah Al-Infitar 82:10

जबकि तुमपर निगरानी करनेवाले नियुक्त हैं

Verse 11 — Surah Al-Infitar 82:11

प्रतिष्ठित लिपिक

Verse 12 — Surah Al-Infitar 82:12

वे जान रहे होते है जो कुछ भी तुम लोग करते हो

Verse 13 — Surah Al-Infitar 82:13

निस्संदेह वफ़ादार लोग नेमतों में होंगे

Verse 14 — Surah Al-Infitar 82:14

और निश्चय ही दुराचारी भड़कती हुई आग में

Verse 15 — Surah Al-Infitar 82:15

जिसमें वे बदले के दिन प्रवेश करेंगे

Verse 16 — Surah Al-Infitar 82:16

और उससे वे ओझल नहीं होंगे

Verse 17 — Surah Al-Infitar 82:17

और तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है

Verse 18 — Surah Al-Infitar 82:18

फिर तुम्हें क्या मालूम कि बदले का दिन क्या है

Verse 19 — Surah Al-Infitar 82:19

जिस दिन कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के लिए किसी चीज़ का अधिकारी न होगा, मामला उस दिन अल्लाह ही के हाथ में होगा