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Hindi - Chapter 37 - As-Saffat
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah As-Saffat 37:1
शपथ है पंक्तिवध्द (फ़रिश्तों) की
Verse 2 — Surah As-Saffat 37:2
फिर झिड़कियाँ देने वालों की
Verse 3 — Surah As-Saffat 37:3
फिर स्मरण करके पढ़ने वालों[1] की
Verse 4 — Surah As-Saffat 37:4
निश्चय तुम्हारा पूज्य, एक ही है।
Verse 5 — Surah As-Saffat 37:5
आकाशों तथा धरती का पालनहार तथा जो कुछ उनके मध्य है और सुर्योदय होने के स्थानों का रब।
Verse 6 — Surah As-Saffat 37:6
हमने अलंकृत किया है संसार (समीप) के आकाश को, तारों की शोभा से।
Verse 7 — Surah As-Saffat 37:7
तथा रक्षा करने के लिए प्रत्येक उध्दत शैतान से।
Verse 8 — Surah As-Saffat 37:8
वह नहीं सुन सकते (जाकर) उच्च सभा तक फ़रिश्तों की बात तथा मारे जाते हैं, प्रत्येक दिशा से।
Verse 9 — Surah As-Saffat 37:9
राँदने के लिए तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
Verse 10 — Surah As-Saffat 37:10
परन्तु, जो ले उड़े कुछ, तो पीछा करती है उसका दहकती ज्वाला।
Verse 11 — Surah As-Saffat 37:11
तो आप इन (काफ़िरों) से प्रश्न करें कि क्या उन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या जिन्हें[1] हमने पैदा किया है? हमने उन्हें[2] पैदा किया है, लेसदार मिट्टी से।
Verse 12 — Surah As-Saffat 37:12
बल्कि आपने आश्चर्य किया (उनके अस्वीकार पर) तथा वे उपहास करते हैं।
Verse 13 — Surah As-Saffat 37:13
और जब शिक्षा दी जाये, तो वे शिक्षा ग्रहण नहीं करते।
Verse 14 — Surah As-Saffat 37:14
और जब देखते हैं कोई निशानी, तो उपहास करने लगते हैं।
Verse 15 — Surah As-Saffat 37:15
तथा कहते हें कि ये तो मात्र खुला जादू है।
Verse 16 — Surah As-Saffat 37:16
(कहते हैं कि) क्या, जब हम मर जायेंगे तथा मिट्टी और हड्डियाँ हो जायेंगे, तो हम निश्चय पुनः जीवित किये जायेंगे
Verse 17 — Surah As-Saffat 37:17
और क्या, हमारे पहले पूर्वज भी (जीवित किये जायेंगे)
Verse 18 — Surah As-Saffat 37:18
आप कह दें कि हाँ तथा तुम अपमानित (भी) होगे
Verse 19 — Surah As-Saffat 37:19
वो तो बस एक झिड़की होगी, फिर सहसा वे देख रहे होंगे।
Verse 20 — Surah As-Saffat 37:20
तथा कहेंगेः हाय हमारा विनाश! ये तो बदले (प्रलय) का दिन है।
Verse 21 — Surah As-Saffat 37:21
यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठला रहे थे।
Verse 22 — Surah As-Saffat 37:22
(आदेश होगा कि) घेर लाओ सब अत्याचारियों को तथा उनके साथियों को और जिसकी वे इबादत (वंदना) कर रहे थे।
Verse 23 — Surah As-Saffat 37:23
अल्लाह के सिवा। फिर दिखा दो उन्हें नरक की राह।
Verse 24 — Surah As-Saffat 37:24
और उन्हें रोक[1] लो। उनसे प्रश्न किया जाये।
Verse 25 — Surah As-Saffat 37:25
क्या हो गया है तुम्हें कि एक-दूसरे की सहायता नहीं करते
Verse 26 — Surah As-Saffat 37:26
बल्कि वे उस दिन, सिर झुकाये खड़े होंगे।
Verse 27 — Surah As-Saffat 37:27
और एक-दूसरे के सम्मुख होकर परस्पर प्रश्न करेंगेः
Verse 28 — Surah As-Saffat 37:28
कहेंगे कि तुम हमारे पास आया करते थे दायें[1] से।
Verse 29 — Surah As-Saffat 37:29
वे[1] कहेंगेः बल्कि तुम स्वयं ईमान वाले न थे।
Verse 30 — Surah As-Saffat 37:30
तथा नहीं था हमारा तुमपर कोई अधिकार,[1] बल्कि तुम सवंय अवज्ञाकारी थे।
Verse 31 — Surah As-Saffat 37:31
तो सिध्द हो गया हमपर हमारे पालनहार का कथन कि हम (यातना) चखने वाले हैं।
Verse 32 — Surah As-Saffat 37:32
तो हमने तुम्हें कुपथ कर दिया। हम तो स्वयं कुपथ थे।
Verse 33 — Surah As-Saffat 37:33
फिर वे सभी, उस दिन यातना में साझी होंगे।
Verse 34 — Surah As-Saffat 37:34
हम, इसी प्रकार, किया करते हैं अपराधियों के साथ।
Verse 35 — Surah As-Saffat 37:35
ये वो हैं कि जब कहा जाता था उनसे कि कोई पूज्य (वंदनीय) नहीं अल्लाह के अतिरिक्त, तो वे अभिमान करते थे।
Verse 36 — Surah As-Saffat 37:36
तथा कह रहे थेः क्या हम त्याग देने वाले हैं अपने पूज्यों को, एक उन्मत कवि के कारण
Verse 37 — Surah As-Saffat 37:37
बल्कि वह (नबी) सच लाये हैं तथा पुष्टि की है, सब रसूलों की।
Verse 38 — Surah As-Saffat 37:38
निश्चय तुम दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
Verse 39 — Surah As-Saffat 37:39
तथा तुम उसका प्रतिकार (बदला) दिये जाओगे, जो तुम कर रहे थे।
Verse 40 — Surah As-Saffat 37:40
परन्तु अल्लाह के शुध्द भक्त।
Verse 41 — Surah As-Saffat 37:41
यही हैं, जिनके लिए विदित जीविका है।
Verse 42 — Surah As-Saffat 37:42
प्रत्येक प्रकार के फल तथा यही आदरणीय होंगे।
Verse 43 — Surah As-Saffat 37:43
सुख के स्वर्गों में।
Verse 44 — Surah As-Saffat 37:44
आसनों पर एक-दूसरे के सम्मुख असीन होंगे।
Verse 45 — Surah As-Saffat 37:45
फिराये जायेंगे इनपर प्याले, प्रवाहित पेय के।
Verse 46 — Surah As-Saffat 37:46
श्वेत आस्वात पीने वालों के लिए।
Verse 47 — Surah As-Saffat 37:47
नहीं होगी उसमें शारिरिक पीड़ा, न वे उसमें बहकेंगे।
Verse 48 — Surah As-Saffat 37:48
तथा उनके पास आँखे झुकाये, (सति) बड़ी आँखों वाली (नारियाँ) होंगी।
Verse 49 — Surah As-Saffat 37:49
वह छुपाये हुए अन्डों के मानिन्द होंगी।
Verse 50 — Surah As-Saffat 37:50
वह एक-दूसरे से सम्मुख होकर प्रश्न करेंगे।
Verse 51 — Surah As-Saffat 37:51
तो कहेगा एक कहने वाला उनमें सेः मेरा एक साथी था।
Verse 52 — Surah As-Saffat 37:52
जो कहता था कि क्या तुम (प्रलय का) विश्वास करने वालों में से हो
Verse 53 — Surah As-Saffat 37:53
क्या जब हम, मर जायेंगे तथा मिट्टी और अस्थियाँ हो जायेंगे, तो क्या हमें (कर्मों) का प्रतिफल दिया जायेगा
Verse 54 — Surah As-Saffat 37:54
वह कहेगाः क्या तुम झाँककर देखने वाले हो
Verse 55 — Surah As-Saffat 37:55
फिर झाँकते ही उसे देख लेगा, नरक के बीच।
Verse 56 — Surah As-Saffat 37:56
उससे कहेगाः अल्लाह की शपथ! तुम तो मेरा विनाश कर देने के समीप थे।
Verse 57 — Surah As-Saffat 37:57
और यदि मेरे पालनहार का अनुग्रह न होता, तो मैं (नरक के) उपस्थितों में होता।
Verse 58 — Surah As-Saffat 37:58
फिर वह कहेगाः क्या (ये सही नहीं है कि) हम मरने वाले नहीं हैं
Verse 59 — Surah As-Saffat 37:59
सिवाय अपनी प्रथम मौत के और न हमें यातना दी जायेगी।
Verse 60 — Surah As-Saffat 37:60
वास्तव में, यही बड़ी सफलता है।
Verse 61 — Surah As-Saffat 37:61
इसी (जैसी सफलता) के लिए चाहिये कि कर्म करें, कर्म करने वाले।
Verse 62 — Surah As-Saffat 37:62
क्या ये आतिथ्य उत्तम है अथवा थोहड़ का वृक्ष
Verse 63 — Surah As-Saffat 37:63
हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।
Verse 64 — Surah As-Saffat 37:64
वह एक वृक्ष है, जो नरक की जड़ (तह) से निकलता है।
Verse 65 — Surah As-Saffat 37:65
उसके गुच्छे शैतानों के सिरों के समान हैं।
Verse 66 — Surah As-Saffat 37:66
तो वे (नरक वासी) खाने वाले हैं, उससे। फिर भरने वाले हैं, उससे अपने पेट।
Verse 67 — Surah As-Saffat 37:67
फिर उनके लिए उसके ऊपर से खौलता गरम पानी है।
Verse 68 — Surah As-Saffat 37:68
फिर उन्हें प्रत्यागत होना है, नरक की ओर।
Verse 69 — Surah As-Saffat 37:69
वास्तव में, उन्होंने पाया अपने पूर्वजों को कुपथ।
Verse 70 — Surah As-Saffat 37:70
फिर वे उन्हीं के पद्चिन्हों पर[1] दौड़े चले जा रहे हैं।
Verse 71 — Surah As-Saffat 37:71
और कुपथ हो चुके हैं, इनसे पूर्व अगले लोगों में से अधिक्तर।
Verse 72 — Surah As-Saffat 37:72
तथा हम भेज चुके हैं उनमें, सचेत (सावधान) करने वाले।
Verse 73 — Surah As-Saffat 37:73
तो देखो कि कैसा रहा सावधान किये हुए लोगों का परिणाम
Verse 74 — Surah As-Saffat 37:74
हमारे शुध्द भक्तों के सिवा।
Verse 75 — Surah As-Saffat 37:75
तथा हमें पुकारा नूह़ नेः तो हम क्या ही अच्छे प्रार्थना स्वीकार करने वाले हैं।
Verse 76 — Surah As-Saffat 37:76
और हमने बचा लिया उसे और उसके परिजनों को, घोर आपदा से।
Verse 77 — Surah As-Saffat 37:77
तथा कर दिया हमने उसकी संतति को, शेष[1] रह जाने वालों में से।
Verse 78 — Surah As-Saffat 37:78
तथा शेष रखा हमने उसकी सराहना तथा प्रशंसा को पिछलों में।
Verse 79 — Surah As-Saffat 37:79
सलाम (सुरक्षा)[1] है नूह़ के लिए समस्त विश्ववासियों में।
Verse 80 — Surah As-Saffat 37:80
इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
Verse 81 — Surah As-Saffat 37:81
वास्तव में, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
Verse 82 — Surah As-Saffat 37:82
फिर हमने जलमगन कर दिया दूसरों को।
Verse 83 — Surah As-Saffat 37:83
और उसके अनुयायियों में निश्चय इब्राहीम है।
Verse 84 — Surah As-Saffat 37:84
जब लाया वह अपने पालनहार के पास स्वच्छ दिल।
Verse 85 — Surah As-Saffat 37:85
जब कहा उसने अपने पिता तथा अपनी जाति सेः तुम किसकी इबादत (वंदना) कर रहे हो
Verse 86 — Surah As-Saffat 37:86
क्या अपने बनाये हुए पूज्यों को अल्लाह के सिवा चाहते हो
Verse 87 — Surah As-Saffat 37:87
तो तुम्हारा क्या विचार है, विश्व के पालनहार के विषय में
Verse 88 — Surah As-Saffat 37:88
फिर उसने देखा तोरों की[1] ओर।
Verse 89 — Surah As-Saffat 37:89
तथा उनसे कहाः मैं रोगी हूँ।
Verse 90 — Surah As-Saffat 37:90
तो उसे छोड़कर चले गये।
Verse 91 — Surah As-Saffat 37:91
फिर वह जा पहुँचा, उनके उपास्यों (पूज्यों) की ओर। कहा कि (वे प्रसाद) क्यों नहीं खाते
Verse 92 — Surah As-Saffat 37:92
तुम्हें क्या हुआ है कि बोलते नहीं
Verse 93 — Surah As-Saffat 37:93
फिर पिल पड़ा उनपर मारते हुए, दायें हाथ से।
Verse 94 — Surah As-Saffat 37:94
तो वे आये उसकी ओर दौड़ते हुए।
Verse 95 — Surah As-Saffat 37:95
इब्राहीम ने कहाः क्या तुम इबादत (वंदना) करते हो उसकी जिसे, पत्थरों से तराश्ते हो
Verse 96 — Surah As-Saffat 37:96
जबकि अल्लाह ने पैदा किया है तुम्हें तथा जो तुम करते हो।
Verse 97 — Surah As-Saffat 37:97
उन्होंने कहाः इसके लिए एक (अग्निशाला का) निर्माण करो और उसे झोंक दो दहकती अग्नि में।
Verse 98 — Surah As-Saffat 37:98
तो उन्होंने उसके साथ षड्यंत्र रचा, तो हमने उन्हीं को नीचा कर दिया।
Verse 99 — Surah As-Saffat 37:99
तथा उसने कहाः मैं जाने वाला हूँ अपने पालनहार की[1] ओर। वह मुझे सुपथ दर्शायेगा।
Verse 100 — Surah As-Saffat 37:100
हे मेरे पालनहार! प्रदान कर मुझे, एक सदाचारी (पुनीत) पुत्र।
Verse 101 — Surah As-Saffat 37:101
तो हमने शुभ सूचना दी उसे, एक सहनशील पुत्र की।
Verse 102 — Surah As-Saffat 37:102
फिर जब वह पहुँचा उसके साथ चलने-फिरने की आयु को, तो इब्राहीम ने कहाः हे मेरे प्रिय पुत्र! मैं देख रहा हूँ स्वप्न में कि मैं तुझे वध कर रहा हूँ। अब, तू बता कि तेरा क्या विचार है? उसने कहाः हे पिता! पालन करें, जिसका आदेश आपको दिया जा रहा है। आप पायेंगे मुझे सहनशीलों में से, यदि अल्लाह की इच्छा हूई।
Verse 103 — Surah As-Saffat 37:103
अन्ततः, जब दोनों ने स्वयं को अर्पित कर दिया और उस (पिता) ने उसे गिरा दिया माथे के बल।
Verse 104 — Surah As-Saffat 37:104
तब हमने उसे आवाज़ दी कि हे इब्राहीम
Verse 105 — Surah As-Saffat 37:105
तूने सच कर दिया अपना स्वप्न। इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
Verse 106 — Surah As-Saffat 37:106
वास्तव में, ये खुली परीक्षा थी।
Verse 107 — Surah As-Saffat 37:107
और हमने उसके मुक्ति-प्रतिदान के रूप में, प्रदान कर दी एक महान[1] बली।
Verse 108 — Surah As-Saffat 37:108
तथा हमने शेष रखी उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
Verse 109 — Surah As-Saffat 37:109
सलाम है इब्रीम पर।
Verse 110 — Surah As-Saffat 37:110
इसी प्रकार, हम प्रतिफल प्रदान करते हैं सदाचारियों को।
Verse 111 — Surah As-Saffat 37:111
निश्चय ही वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
Verse 112 — Surah As-Saffat 37:112
तथा हमने उसे शुभसूचना दी इस्ह़ाक़ नबी की, जो सदाचारियों में[1] होगा।
Verse 113 — Surah As-Saffat 37:113
तथा हमने बरकत (विभूति) अवतरिक की उसपर तथा इस्ह़ाक़ पर और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने लिए खुला अत्याचारी।
Verse 114 — Surah As-Saffat 37:114
तथा हमने उपकार किया मूसा और हारून पर।
Verse 115 — Surah As-Saffat 37:115
तथा मुक्त किया दोनों को और उनकी जाति को, घोर व्यग्रता से।
Verse 116 — Surah As-Saffat 37:116
तथा हमने सहायता की उनकी, तो वही प्रभावशाली हो गये।
Verse 117 — Surah As-Saffat 37:117
तथा हमने प्रदान की दोनों को प्रकाशमय पुस्तक (तौरात)।
Verse 118 — Surah As-Saffat 37:118
और हमने दर्शाई दोनों को सीधी डगर।
Verse 119 — Surah As-Saffat 37:119
तथा शेष रखी दोनों की शुभ चर्चा, पिछलों में।
Verse 120 — Surah As-Saffat 37:120
सलाम है मूसा तथा हारून पर।
Verse 121 — Surah As-Saffat 37:121
हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
Verse 122 — Surah As-Saffat 37:122
वस्तुतः, वे दोनों हमारे ईमान वाले भक्तों में थे।
Verse 123 — Surah As-Saffat 37:123
तथा निश्चय इल्यास, नबियों में से था।
Verse 124 — Surah As-Saffat 37:124
जब कहा उसने अपनी जाति सेः क्या तुम डरते नहीं हो
Verse 125 — Surah As-Saffat 37:125
क्या तुम बअल ( नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा त्याग रहे हो सर्वोत्तम उत्पत्तिकर्ता को
Verse 126 — Surah As-Saffat 37:126
अल्लाह ही तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे प्रथम पूर्वजों का पालनहार है।
Verse 127 — Surah As-Saffat 37:127
अन्ततः, उन्होंने झुठला दिया उसे। तो निश्चय वही (नरक में) उपस्थित होंगे।
Verse 128 — Surah As-Saffat 37:128
किन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।
Verse 129 — Surah As-Saffat 37:129
तथा शेष रखी हमने उसकी शुभ चर्चा पिछलों में।
Verse 130 — Surah As-Saffat 37:130
सलाम है इल्यासीन[1] पर।
Verse 131 — Surah As-Saffat 37:131
वास्तव में, हम इसी प्रकार प्रतिफल प्रदान करते हैं, सदाचारियों को।
Verse 132 — Surah As-Saffat 37:132
वस्तुतः, वह हमारे ईमान वाले भक्तों में से था।
Verse 133 — Surah As-Saffat 37:133
तथा निश्चय लूत नबियों में से था।
Verse 134 — Surah As-Saffat 37:134
जब हमने मुक्त किया उसे तथा उसके सबपरिजनों को।
Verse 135 — Surah As-Saffat 37:135
एक बुढ़िया[1] के सिवा, जो पीछे रह जाने वालों में थी।
Verse 136 — Surah As-Saffat 37:136
फिर हमने अन्यों को तहस-नहस कर दिया।
Verse 137 — Surah As-Saffat 37:137
तथा तुम[1] ग़ुज़रते हो उन (की निर्जीव बस्तियों) पर, प्रातः के समय।
Verse 138 — Surah As-Saffat 37:138
तथा रात्रि में। तो क्या तुम समझते नहीं हो
Verse 139 — Surah As-Saffat 37:139
तथा निश्चय यूनुस नबियों में से था।
Verse 140 — Surah As-Saffat 37:140
जब वह भाग[1] गया भरी नाव की ओर।
Verse 141 — Surah As-Saffat 37:141
फिर नाम निकाला गया, तो वह हो गया फेंके हुओं में से।
Verse 142 — Surah As-Saffat 37:142
तो निगल लिया उसे मछली ने और वह निन्दित था।
Verse 143 — Surah As-Saffat 37:143
तो यदि न होता अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में।
Verse 144 — Surah As-Saffat 37:144
तो वह रह जाता उसके उदर में उस दिन तक, जब सब पुनः जीवित किये[1] जायेंगे।
Verse 145 — Surah As-Saffat 37:145
तो हमने फेंक दिया उसे खुले मैदान में और वह रोगी[1] था।
Verse 146 — Surah As-Saffat 37:146
और उगा दिया उस[1] पर लताओं का एक वृक्ष।
Verse 147 — Surah As-Saffat 37:147
तथा हमने उसे रसूल बनाकर भेजा एक लाख, बल्कि अधिक की ओर।
Verse 148 — Surah As-Saffat 37:148
तो वे ईमान लाये। फिर हमने उन्हें सुख-सुविधा प्रदान की एक समय[1] तक।
Verse 149 — Surah As-Saffat 37:149
तो (हे नबी!) आप उनसे प्रश्न करें कि क्या आपके पालनहार के लिए तो पुत्रियाँ हों और उनके लिए पुत्र
Verse 150 — Surah As-Saffat 37:150
अथवा किया हमने पैदा किया है फ़रिश्तों को नारियाँ और वे उस समय उपस्थित[1] थे
Verse 151 — Surah As-Saffat 37:151
सावधान! वास्तव में, वे अपने मन से बनाकर ये बात कह रहे हैं।
Verse 152 — Surah As-Saffat 37:152
कि अल्लाह ने संतान बनाई है और निश्चय ये मिथ्या भाषी हैं।
Verse 153 — Surah As-Saffat 37:153
क्या अल्लाह ने प्राथमिक्ता दी है पुत्रियों को, पुत्रों पर
Verse 154 — Surah As-Saffat 37:154
तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा निर्णय दे रहे हो
Verse 155 — Surah As-Saffat 37:155
तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते
Verse 156 — Surah As-Saffat 37:156
अथवा तुम्हारे पास कोई प्रत्यक्ष प्रमाण है
Verse 157 — Surah As-Saffat 37:157
तो अपनी पुस्तक लाओ, यदि तुम सत्यवादी हो
Verse 158 — Surah As-Saffat 37:158
और उन्होंने बना दिया अल्लाह तथा जिन्नों के मध्य, वंश-संबंध। जबकि जिन्न स्वयं जानते हैं कि वे अल्लाह के समक्ष निश्चय उपस्थित किये[1] जायेंगे।
Verse 159 — Surah As-Saffat 37:159
अल्लाह पवित्र है उन गुणों से, जिनका वे वर्णन कर रहे हैं।
Verse 160 — Surah As-Saffat 37:160
परन्तु, अल्लाह के शुध्द भक्त।
Verse 161 — Surah As-Saffat 37:161
तो निश्चय तुम तथा तुम्हारे पूज्य।
Verse 162 — Surah As-Saffat 37:162
तुम सब किसी एक को भी कुपथ नहीं कर सकते।
Verse 163 — Surah As-Saffat 37:163
उसके सिवा, जो नरक में झोंका जाने वाला है।
Verse 164 — Surah As-Saffat 37:164
और नहीं है हम (फ़रिश्तों) में से कोई, परन्तु उसका एक नियमित स्थान है।
Verse 165 — Surah As-Saffat 37:165
तथा हम ही (आज्ञापालन के लिए) पंक्तिवध्द हैं।
Verse 166 — Surah As-Saffat 37:166
और हम ही तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।
Verse 167 — Surah As-Saffat 37:167
तथा वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे किः
Verse 168 — Surah As-Saffat 37:168
यदि हमारे पास कोई स्मृति (पुस्तक) होती, जो पहले लोगों में आई
Verse 169 — Surah As-Saffat 37:169
तो हम अवश्य अल्लाह के शुध्द भक्तों में हो जाते।
Verse 170 — Surah As-Saffat 37:170
(फिर जब आ गयी) तो उन्होंने क़ुर्आन के साथ कुफ़्र कर दिया, अतः, शीघ्र ही उन्हें ज्ञान हो जायेगा।
Verse 171 — Surah As-Saffat 37:171
और पहले ही हमारा वचन हो चुका है अपने भेजे हुए भक्तों के लिए।
Verse 172 — Surah As-Saffat 37:172
कि निश्चय उन्हीं की सहायता की जायेगी।
Verse 173 — Surah As-Saffat 37:173
तथा वास्तव में हमारी सेना ही प्रभावशाली (विजयी) होने वाली है।
Verse 174 — Surah As-Saffat 37:174
तो आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
Verse 175 — Surah As-Saffat 37:175
तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।
Verse 176 — Surah As-Saffat 37:176
तो क्या, वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं।
Verse 177 — Surah As-Saffat 37:177
तो जब वह उतर आयेगी उनके मैदानों में, तो बुरा हो जायेगा सावधान किये हुओं का सवेरा।
Verse 178 — Surah As-Saffat 37:178
और आप मुँह फेर लें उनसे, कुछ समय तक।
Verse 179 — Surah As-Saffat 37:179
तथा देखते रहें, अन्ततः वे (भी) देख लेंगे।
Verse 180 — Surah As-Saffat 37:180
पवित्र है आपका पालनहार, गौरव का स्वामी, उस बात से, जो वे बना रहे हैं।
Verse 181 — Surah As-Saffat 37:181
तथा सलाम है रसूलों पर।
Verse 182 — Surah As-Saffat 37:182
तथा सभी प्रशंसा, अल्लाह, सर्वलोक के पालनहार के लिए है।