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Hindi - Chapter 87 - Al-Ala
Translation by Maulana Azizul Haque Al Umari — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Ala 87:1
अपने सर्वोच्च प्रभु के नाम की पवित्रता का स्मरण करो।
Verse 2 — Surah Al-Ala 87:2
जिसने पैदा किया और ठीक-ठीक बनाया।
Verse 3 — Surah Al-Ala 87:3
और जिसने अनुमान लगाकर निर्धारित किया, फिर सीधी राह दिखायी।
Verse 4 — Surah Al-Ala 87:4
और जिसने चारा उपजाया।
Verse 5 — Surah Al-Ala 87:5
फिर उसे (सुखा कर) कूड़ा बना दिया।
Verse 6 — Surah Al-Ala 87:6
(हे नबी!) हम तुम्हें ऐसा पढ़ायेंगे कि भूलोगे नहीं।
Verse 7 — Surah Al-Ala 87:7
परन्तु, जिसे अल्लाह चाहे। निश्चय ही वह सभी खुली तथा छिपी बातों को जानता है।
Verse 8 — Surah Al-Ala 87:8
और हम तुम्हें सरल मार्ग का साहस देंगे।
Verse 9 — Surah Al-Ala 87:9
तो आप धर्म की शिक्षा देते रहें। अगर शिक्षा लाभदायक हो।
Verse 10 — Surah Al-Ala 87:10
डरने वाला ही शिक्षा ग्रहण करेगा।
Verse 11 — Surah Al-Ala 87:11
और दुर्भाग्य उससे दूर रहेगा।
Verse 12 — Surah Al-Ala 87:12
जो भीषण अग्नि में जायेगा।
Verse 13 — Surah Al-Ala 87:13
फिर उसमें न मरेगा, न जीवित रहेगा।
Verse 14 — Surah Al-Ala 87:14
वह सफल हो गया, जिसने अपना शुध्दिकरण किया।
Verse 15 — Surah Al-Ala 87:15
तथा अपने पालनहार के नाम का स्मरण किया और नमाज़ पढ़ी।
Verse 16 — Surah Al-Ala 87:16
बल्कि तुम लोग तो सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो।
Verse 17 — Surah Al-Ala 87:17
जबकि आख़िरत का जीवन ही उत्त्म और स्थायी है।
Verse 18 — Surah Al-Ala 87:18
यही बात, प्रथम ग्रन्थों में है।
Verse 19 — Surah Al-Ala 87:19
(अर्थात) इब्राहीम तथा मूसा के ग्रन्थों में।