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Hindi - Chapter 87 - Al-Ala
Translation by Muhammad Farooq Khan And Muhammad Ahmed — Permalink
Verse 1 — Surah Al-Ala 87:1
तसबीह करो, अपने सर्वाच्च रब के नाम की
Verse 2 — Surah Al-Ala 87:2
जिसने पैदा किया, फिर ठीक-ठाक किया
Verse 3 — Surah Al-Ala 87:3
जिसने निर्धारित किया, फिर मार्ग दिखाया
Verse 4 — Surah Al-Ala 87:4
जिसने वनस्पति उगाई
Verse 5 — Surah Al-Ala 87:5
फिर उसे ख़ूब घना और हरा-भरा कर दिया
Verse 6 — Surah Al-Ala 87:6
हम तुम्हें पढ़ा देंगे, फिर तुम भूलोगे नहीं
Verse 7 — Surah Al-Ala 87:7
बात यह है कि अल्लाह की इच्छा ही क्रियान्वित है। निश्चय ही वह जानता है खुले को भी और उसे भी जो छिपा रहे
Verse 8 — Surah Al-Ala 87:8
हम तुम्हें सहज ढंग से उस चीज़ की पात्र बना देंगे जो सहज एवं मृदुल (आरामदायक) है
Verse 9 — Surah Al-Ala 87:9
अतः नसीहत करो, यदि नसीहत लाभप्रद हो
Verse 10 — Surah Al-Ala 87:10
नसीहत हासिल कर लेगा जिसको डर होगा
Verse 11 — Surah Al-Ala 87:11
किन्तु उससे कतराएगा वह अत्यन्त दुर्भाग्यवाला
Verse 12 — Surah Al-Ala 87:12
जो बड़ी आग में पड़ेगा
Verse 13 — Surah Al-Ala 87:13
फिर वह उसमें न मरेगा न जिएगा
Verse 14 — Surah Al-Ala 87:14
सफल हो गया वह जिसने अपने आपको निखार लिया
Verse 15 — Surah Al-Ala 87:15
और अपने रब के नाम का स्मरण किया, अतः नमाज़ अदा की
Verse 16 — Surah Al-Ala 87:16
नहीं, बल्कि तुम तो सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो
Verse 17 — Surah Al-Ala 87:17
हालाँकि आख़िरत अधिक उत्तम और शेष रहनेवाली है
Verse 18 — Surah Al-Ala 87:18
निस्संदेह यही बात पहले की किताबों में भी है
Verse 19 — Surah Al-Ala 87:19
इबराईम और मूसा की किताबों में